नयी दिल्ली 25 जुलाई (वार्ता) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को 27वें कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर द्रास में आयोजित एक स्मृति समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि दुश्मन की ओर से लगातार छद्म युद्ध और घुसपैठ की कोशिशों के बावजूद भारतीय सशस्त्र बल “हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार” हैं।
1999 के कारगिल युद्ध के वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन विजय के दौरान प्रदर्शित साहस, संकल्प और देशभक्ति आज भी सशस्त्र बलों और पूरे राष्ट्र को प्रेरित करती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब तक देश के सैनिकों का अटूट संकल्प और राष्ट्रभक्ति कायम है, तब तक भारत की सुरक्षा सुनिश्चित रहेगी।
कारगिल विजय को स्मरण करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि देश के सामने सुरक्षा चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। उन्होंने सैनिकों के कल्याण और रक्षा आधुनिकीकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सेना को विश्वस्तरीय हथियारों, प्रशिक्षण और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से सुसज्जित किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की बढ़ती प्रगति भविष्य में भारतीय सशस्त्र बलों को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में शामिल करेगी।
दिनभर चले कार्यक्रमों में कारगिल युद्ध स्मारक पर आयोजित ‘शौर्य संध्या’ शामिल रही, जहां कारगिल के वीरों के परिजनों का सम्मान किया गया, सर्वधर्म प्रार्थना सभा आयोजित हुई और रक्षा मंत्री ने स्मारक पर दीप प्रज्वलित कर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं ‘युद्ध संस्मरण’ कार्यक्रम में युद्ध के पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिजनों ने भाग लिया तथा ऑपरेशन विजय के वीरों की वीरगाथाओं को प्रदर्शित किया गया।
समारोहों के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ ड्रोन, रोबोटिक म्यूल और मार्शल आर्ट प्रदर्शन भी आयोजित किए गए। ‘शौर्य भोज’ में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक, वीरता पुरस्कार विजेता, वीर नारियां, शहीदों के परिजन और अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए।
समारोहों का समापन 26 जुलाई को ‘श्रद्धांजलि समारोह’ के साथ होगा, जिसमें रक्षा मंत्री राष्ट्र की ओर से कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले 545 वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इनमें भारतीय सेना के 537 जवान, भारतीय वायुसेना के पांच कर्मी, सीमा सुरक्षा बल का एक जवान तथा दो नागरिक शामिल हैं।
