नई दिल्ली, 24 जुलाई (वार्ता) राजधानी में जनपथ स्थित सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज़ एम्पोरियम (सीसीआईई) में ‘वीव्स ऑफ इंडिया’ महोत्सव का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय द्वारा आयोजित यह महोत्सव 24 जुलाई से 7 अगस्त तक आम जनता के लिए खुला रहेगा।
सात अगस्त को 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के उपलक्ष्य में किया जा रहा है।
कपड़ा मंत्रालय द्वारा जारी यह महोत्सव भारत की समृद्ध और विविध हथकरघा परंपराओं का विशेष प्रदर्शन है। इसमें देशभर की 116 विरासत हथकरघा बुनाई शैलियों (हेरिटेज वीव्स) के उत्कृष्ट हस्तनिर्मित वस्त्र प्रदर्शित किए गए हैं। यह आयोजन आगंतुकों को भारतीय बुनकरों की पीढ़ियों से संजोई गई अद्भुत कारीगरी, कलात्मक उत्कृष्टता और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने और समझने का अवसर प्रदान करता है।
प्रदर्शनी में ओडिशा, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, मणिपुर, छत्तीसगढ़, बिहार, तेलंगाना, गुजरात, जम्मू-कश्मीर और त्रिपुरा सहित अनेक राज्यों की प्रसिद्ध बुनाई परंपराओं को प्रदर्शित किया गया है। दर्शक यहां भारत की प्रतिष्ठित हथकरघा परंपराओं जैसे बनारसी, जामदानी, कांचीपुरम सिल्क, संबलपुरी इकट, पैठणी, कानी पश्मीना, बावन बूटी, कोटपाड, इलकल, कासरगोड, हिमरू और रिशा जैसी विशिष्ट बुनाई शैलियों को देख सकेंगे। ये सभी अपने-अपने क्षेत्रों की सांस्कृतिक पहचान और वस्त्र विरासत का प्रतिनिधित्व करती हैं।
महोत्सव का उद्देश्य प्रामाणिक हस्तनिर्मित हथकरघा उत्पादों के प्रति लोगों में जागरूकता और सराहना बढ़ाना भी है। साथ ही यह सतत , नैतिक और कारीगर-आधारित उत्पादन प्रणाली के महत्व को भी रेखांकित करता है। यह आयोजन मास्टर बुनकरों, डिजाइनरों, संग्रहकर्ताओं, खरीदारों, शोधकर्ताओं और आम जनता के बीच संवाद और विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच भी उपलब्ध कराता है।
