नई दिल्ली 5 फरवरी (वार्ता) नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पदाधिकारियों के निलंबन को छात्र लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया है। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने कहा कि यह कार्रवाई जेएनयू के करीब 8,000 छात्रों के जनादेश का अपमान है, जिन्होंने अपने प्रतिनिधियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुना है।
श्री चौधरी ने आरोप लगाया कि जब “सरकारी” छात्र संगठन चुनाव जीतने में असफल रहता है, तब सरकार और प्रशासन विरोधी छात्र संगठनों की आवाज दबाने के लिए निलंबन, जुर्माने और डराने-धमकाने जैसे हथकंडे अपनाते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पुस्तकालय में कथित अनधिकृत बायोमेट्रिक निगरानी के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध करने पर पदाधिकारियों को दंडित करना एक खतरनाक तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है।
एनएसयूआई ने दोहरे मापदंडों का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता समर्थक संगठनों से जुड़े लोग गंभीर घटनाओं के बाद भी खुले आम घूमते हैं, जबकि जेएनयू और अन्य विश्वविद्यालयों में विपक्षी छात्र नेतृत्व को छात्रों के मुद्दे उठाने पर निशाना बनाया जा रहा है। एनएसयूआई ने जेएनयू छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए निलंबन तुरंत रद्द करने, अनुचित जुर्माने वापस लेने और डर की राजनीति समाप्त करने की मांग की है।

