इंदौर: भंवरकुआं स्थित टंट्या भील चौराहे पर नीट पेपर लीक और 23 सूत्रीय मांगों को लेकर छात्रों का आंदोलन गुरुवार को 24वें दिन भी जारी रहा. आंदोलन में शामिल छात्रों का कहना है कि यह केवल नीट परीक्षा तक सीमित मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के भविष्य से जुड़ा संघर्ष है.धरना स्थल पर प्रतिदिन छात्रों की संख्या बढ़ने का दावा किया जा रहा है. आंदोलनकारियों के अनुसार अभिभावक और स्थानीय नागरिक किसी न किसी रूप में इस आंदोलन से जुड़ चुके हैं. हाल के दिनों में अधिवक्ताओं का एक समूह भी छात्रों के समर्थन में पहुंचा है, जो उनकी मांगों को कानूनी रूप से प्रभावी ढंग से रखने में सहयोग कर रहा है.
अभिभावक भी समय-समय पर धरना स्थल पर पहुंचकर छात्रों का मनोबल बढ़ा रहे हैं. आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में नीट पेपर लीक मामले के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल है. छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा. उनका दावा है कि आंदोलन अब अनिश्चितकालीन स्वरूप की ओर बढ़ रहा है. छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं चल रहा है. उनका कहना है कि जो भी जनप्रतिनिधि या सामाजिक संगठन धरना स्थल पर आते हैं, उनसे केवल छात्र हित से जुड़े मुद्दों पर ही समर्थन देने का आग्रह किया जाता है. बुधवार देर रात पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी धरना स्थल पर पहुंचे और छात्रों से चर्चा कर उनका समर्थन किया. आंदोलनकारियों का कहना है कि इंदौर के अलावा प्रदेश के अन्य जिलों और राज्य से बाहर के लोग भी समर्थन देने पहुंच रहे हैं.
प्रशासन ने की सुरक्षा व्यवस्था
वहीं प्रशासन की ओर से धरना स्थल और आसपास के क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की गई है. अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संचालित हो, इसके लिए स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक व्यवस्था और यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं.
सरकार का ध्यान आकर्षित करना उद्देश्य
छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आंदोलन और सरकार के बीच बातचीत का कोई रास्ता निकलता है या नहीं.
