राज ठाकरे ने नीट पेपर लीक का विरोध करने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर केंद्र पर तीखा हमला बोला

मुंबई, 21 जुलाई (वार्ता) महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने नीट परीक्षा में पेपर लीक और अन्याय के खिलाफ दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस के बर्बर लाठीचार्ज को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद तीखा और आक्रामक हमला बोला है।

सोशल मीडिया पर पुलिस के लाठीचार्ज का वीडियो साझा करते हुये श्री ठाकरे ने टिप्पणी की, “घटनाओं के क्रम को देखकर – 18 जुलाई को सोनम वांगचुक को घसीटे जाने और जबरन अस्पताल में भर्ती कराये जाने से लेकर कल छात्रों पर हुये बेरहम लाठीचार्ज तक – यह साफ है कि यह सरकार खुद ‘मानसिक रूप से बीमार’ हो गयी है और अब इसे अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत है।”

केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हटाने में की जा रही आनाकानी पर सवाल उठाते हुये उन्होंने पूछा, “आखिर धर्मेंद्र प्रधान हैं ही कौन, जिनका इस्तीफा लेने को सरकार अपनी नाकामी मान रही है?” इसकी तुलना मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह को पहले दिये गये बचाव से करते हुये उन्होंने कहा कि शीर्ष दो सत्ताधारी नेताओं को इन लोगों या जनता से कोई सहानुभूति नहीं है।

चुनाव तंत्र पर तीखा तंज कसते हुये मनसे प्रमुख ने कहा कि सत्ताधारी शासन को जनमत की कोई परवाह नहीं है क्योंकि, “हम आपके वोटों से चुनाव नहीं जीतते, हम तो पूरी व्यवस्था के दम पर, मतदाता सूचियों में गड़बड़ी करके और जाहिर तौर पर ईवीएम के बल पर चुने जाते हैं।”

प्रधानमंत्री की चुप्पी की आलोचना करते हुये उन्होंने ‘कमजोर स्थिति वाले’ राष्ट्रप्रमुख शब्द का इस्तेमाल किया और कहा कि अपने अंतिम कार्यकाल में प्रधानमंत्री अक्सर आराम के मूड में होते हैं, दुनिया भर का दौरा करते हैं और उनका प्रभाव कम होता जाता है जबकि उनका उत्तराधिकारी व्यवस्था को संभालने लगता है।

उन्होंने कहा, “भले ही श्री मोदी के मन में इस पर कार्रवाई करने की इच्छा हो, लेकिन उनका उत्तराधिकारी बनने की होड़ में लगी ताकतें शायद उन्हें आंखें मूंदने पर मजबूर कर रही हैं। इतिहास याद रखेगा कि जब श्री मोदी प्रधानमंत्री थे, तब छात्रों के आंदोलनों को बेरहमी से कुचला गया था!”

प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुये श्री ठाकरे ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह करता हूं – आप ‘परीक्षा पर चर्चा’ और अन्य कार्यक्रम आयोजित करते हैं, तो अब छात्रों से भी चर्चा करें। उनकी मांगें बिल्कुल सही हैं। धर्मेंद्र प्रधान और सरकार का घमंड देश के छात्रों के आक्रोश से बड़ा नहीं है।”

श्री ठाकरे ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन की तुलना 2011 की अरब क्रांति, श्रीलंका के 2022 के विरोध प्रदर्शनों और जयप्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति से की। ये सभी आंदोलन भी छात्रों के असंतोष से ही शुरू हुए थे। उन्होंने कहा, “लोकपाल बिल आंदोलन के दम पर हासिल की गयी सत्ता का अंत छात्रों के आंदोलन से होना तय है! ”

अपनी पार्टी के रुख को दोहराते हुये श्री ठाकरे ने कहा कि मनसे ने शुरुआत से ही छात्रों की मांगों का समर्थन किया है। उन्होंने याद दिलाया कि उनकी पार्टी नीट जैसी केंद्रीय परीक्षाओं का विरोध करने वाली पहली पार्टी थी और चेतावनी दी कि केंद्र को पहले से बनी व्यवस्थाओं में बेवजह दखल नहीं देना चाहिए था।

 

 

Next Post

विराट कोहली की सलाह से मुश्किल दौर से बाहर निकलने में मदद मिली :पीवी सिंधु

Tue Jul 21 , 2026
नयी दिल्ली, 21 जुलाई (वार्ता) दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट पीवी सिंधु ने बताया है कि कैसे भारतीय क्रिकेट टीम के लीजेंड विराट कोहली ने उनके बैडमिंटन करियर के सबसे मुश्किल दौर में उनकी मदद की। सोशल मीडिया पर एक इमोशनल पोस्ट में, पीवी सिंधु ने बताया कि कैसे भारत […]

You May Like