भोपाल। राजधानी भोपाल में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शहर में पहली बार इलेक्ट्रिक बसों का ट्रायल रन शुरू हो गया है। अगले पांच दिनों तक अलग-अलग रूटों पर इन बसों का परीक्षण किया जाएगा, ताकि तकनीकी खामियों और ट्रैफिक से जुड़ी चुनौतियों का आकलन किया जा सके। पहले दिन ट्रायल सफल रहा और बसों ने 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सफर करते हुए घाटियों और व्यस्त सड़कों पर भी बेहतर प्रदर्शन किया।
नई ई-बसों की सबसे बड़ी खासियत दिव्यांग यात्रियों के लिए हाइड्रोलिक डोर है, जिससे व्हीलचेयर और ट्राइसाइकिल के साथ आसानी से बस में चढ़ा और उतरा जा सकेगा। बस के अंदर दो व्हीलचेयर खड़ी करने की पर्याप्त जगह भी दी गई है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए हर बस में 6 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी निगरानी बैरागढ़ डिपो के कंट्रोल रूम से होगी। बसों में दो ऑटोमैटिक दरवाजे भी हैं, जिन्हें ड्राइवर नियंत्रित करेगा।
करीब 9 मीटर लंबी ये ई-बसें मौजूदा सिटी बसों की तुलना में छोटी हैं, जिससे भोपाल की संकरी सड़कों और भारी ट्रैफिक में इन्हें चलाना आसान होगा। ट्रायल के दौरान बसों का संचालन बैरागढ़ डिपो, पुराने भोपाल, बोर्ड ऑफिस, भोपाल रेलवे स्टेशन और कोलार के बैरागढ़-चीचली रूट पर किया जा रहा है। अभी तक 21 इलेक्ट्रिक बसें भोपाल पहुंच चुकी हैं, जबकि अगले 10 से 12 दिनों में 20 और बसें आने की उम्मीद है। बैरागढ़ डिपो में 11 चार्जिंग पॉइंट भी तैयार कर लिए गए हैं। ट्रायल सफल होने के बाद जल्द ही भोपालवासियों को सुरक्षित, आधुनिक और प्रदूषण मुक्त ई-बस सेवा का लाभ मिलेगा।
