मोहनगढ़:ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क किनारे लगने वाले साप्ताहिक हाट बाजारों से बढ़ते हादसों और ट्रैफिक अव्यवस्था को देखते हुए सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर निर्धारित स्थानों पर हाट बाजार विकसित कराए थे। लेकिन लापरवाही और गलत स्थान चयन के कारण ये भवन आज अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। हालत यह है कि कई हाट बाजार जर्जर हो चुके हैं और दुकानदार यहां बैठने में रुचि नहीं दिखा रहे। प्रशासन भी इनके संरक्षण की दिशा में सक्रिय नजर नहीं आता।
ग्रामीण बताते हैं कि बरेठी, बिंदारी खास, बंधा मोहनगढ़, दरगाय खुर्द, हतेरी, खाकरॉन और गोर गांव में ग्राम पंचायत विभाग एवं आरईएस द्वारा निर्मित हाट बाजार आज शोपीस बनकर खड़े हैं। बजाय इसके कि गांवों के साप्ताहिक बाजार इन भवनों में शिफ्ट हों, लोग अभी भी सड़क किनारे ही दुकानें लगा रहे हैं, जिससे हादसों का खतरा जस का तस बना हुआ है।
कुछ जगहों पर स्थिति और खराब है,हाट बाजार भवनों का उपयोग ग्रामीण पशु बांधने या कृषि उपकरण रखने के लिए कराने लगे हैं। लोगों का कहना है कि हाट बाजार गांव से काफी दूर बना दिए गए, जिससे वहां लोग पहुंचना ही नहीं चाहते। ऐसे में सरकारी धन का सही उपयोग न होना ग्रामीणों में नाराज़गी का कारण बन गया है।
इस संबंध में पृथ्वीपुर विधानसभा के कांग्रेस विधायक नितेंद्र सिंह राठौर ने कहा कि सरकार द्वारा योजनाओं के तहत खर्च किया गया हर पैसा जनता का धन है और इसका उपयोग जनता के हित में होना चाहिए। यदि हाट बाजार बनाए गए हैं तो उनके उपयोग और देखरेख की जिम्मेदारी प्रशासन की है। उन्होंने कहा कि गुणवत्ताहीन और अनुपयोगी निर्माण कार्यों में लिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध जांच होना जरूरी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
