बंदर अब्बास से तबरीज तक कोहराम… अमेरिका के भीषण हमले से थर्राया ईरान, निशाने पर परमाणु केंद्र

अमेरिकी सेना ने सोमवार से ईरान के सैन्य ठिकानों पर भीषण हमले शुरू किए हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा के लिए की गई इस कार्रवाई से तनाव बढ़ गया है।

अमेरिकी सेना ने लगातार दसवीं रात ईरान पर बमबारी की है, जिससे क्षेत्र में भारी अस्थिरता पैदा हो गई है। सोमवार देर रात शुरू हुए ये हमले ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को खत्म करने के लिए किए गए हैं, जिनका उपयोग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा था।

बंदर अब्बास से तबरीज तक कोहराम
अमेरिकी सेना के इस हमले से ईरान के कई प्रमुख शहर धमाकों से दहल उठे हैं। दक्षिण-पूर्वी शहरों चाबहार और कोनारक के साथ-साथ महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में भारी विस्फोटों की सूचना मिली है।

ईरानी मीडिया के मुताबिक, राजधानी तेहरान से लगभग 520 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिमी शहर तबरीज में भी मिसाइलें गिरी हैं, जहां ईरान के ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ के भूमिगत मिसाइल बेस मौजूद हैं। इस कार्रवाई में तबरीज के पास एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है।

एक्टिव हुआ एयर डिफेंस सिस्टम
तनाव की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट के पास ईरान ने अपनी एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिव कर दिया है। इसके अलावा, ईरानी हमलों के खतरे को देखते हुए कुवैत, जॉर्डन और बहरीन ने भी अपने सुरक्षा तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा है। जॉर्डन की सेना ने सोमवार शाम तीन ईरानी मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया है।

ईरान का अमेरिका पर पलटवार
इन हमलों के बाद ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB ने सोशल मीडिया पर एक जलते हुए जहाज की तस्वीर शेयर की है। इस पोस्ट के जरिए ईरान ने जलते जहाज के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे ‘अमेरिका पर भरोसा करने का अंजाम’ बताया है।

हूतियों ने दी धमकी
इस युद्ध के बीच यमन के ईरान समर्थित हूतियों ने सऊदी अरब को लाल सागर में जहाज भेजने से रोकने की चेतावनी दी है, जिससे ऊर्जा संकट और गहरा सकता है। दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी सैनिकों की हत्या की ईरान को भारी कीमत चुकानी होगी।

तेल की कीमतों में उछाल
संकट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की एक-तिहाई तेल आपूर्ति का मुख्य मार्ग है, जहां वर्तमान में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। इस सैन्य संघर्ष का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ा है, जहां सोमवार को बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 88 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। अमेरिका में भी गैसोलीन की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिससे आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले घरेलू दबाव बढ़ रहा है।

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