
भोपाल। हाईटेक हमीदिया अस्पताल में इन दिनों नियमों की धज्जियां इस तरह उड़ रही हैं कि परिसर में जहां एक तरफ मरीजों का इलाज चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ खुले में बायोमेडिकल वेस्ट का पहाड़ खड़ा हो रहा है. अस्पताल से आने वाले इस मेडिकल वेस्ट में इस्तेमाल की गई सिरिंज, यूरिन बैग, खून से सने ग्लव्स, पट्टियां और मानव अंग के अपशिष्ट शामिल हैं। जो कि संक्रामक बीमारियों का स्रोत हैं और इन्हें नर्सिग गर्ल्स हॉस्टल के ठीक सामने खुले में डम्प किया जा रहा है. जिससे आसपास बदबू तो फैल ही रही है बल्कि छात्रावास में रहने वाली छात्राओं का हाल भी बदहाल है. वहीं जानकारी के अनुसार कचरा उठाने वाली गाड़ी कई दिनों तक नहीं आती. जिसके कारण हफ्तों से ज्यादा तक वेस्टेज खुले में पड़े रहते हैं. इतना ही नहीं इन कचरों को उठाने के लिये जिन कर्मियों को लगाया गया है, उन्हे न तो मास्क दिया जाता है और न ही कोई किट दी जाती है. जिससे मजबूरन कर्मियों को बिना स्वास्थ्य सुरक्षा के इन अपशिष्ट पदार्थों को उठाना पड़ रहा है.
-खुले में बायोमेडिकल वेस्ट से खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार खुले में बायोमेडिकल वेस्ट के पड़े रहने से और कर्मियों को सुरक्षा किट न देने से उन्हे एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और वायरल संक्रमण फैलने का खतरा रहता है.
-मेडिकल वेस्ट उठाने वालों के लिए सुरक्षा नियम
बायोमेडिकल वेस्ट को उठाने वाले कर्मियों को संक्रमण, चोट और खतरनाक रसायनों से बचाने के लिए विशेष व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण दिए जाते हैं। जिसमें इन्हें मोटे और मजबूत रबर या नाइट्राइल से बने दस्ताने दिए जाते हैं। जो सुई चुभने या कांच से कटने के खतरे को रोकते हैं। साथ ही पैरों की सुरक्षा के लिए घुटनों तक लंबे रबर के जूते, एन 95 मास्क, फेस शील्ड, वॉटरप्रूफ एप्रन या गाउन और सिर ढंकने के लिए डिस्पोजेबल कैप दी जाती है। जिससे इन्हें संक्रमण से होने से सुरक्षा मिल सके.
-इनका कहना है
अस्पताल से निकले वाले ऐसे अपशिष्ट पदार्थों के निस्तारण के लिए किसी कंपनी से एमओयू होता है. जिसके माध्यम से कर्मियों द्वारा कचरे को गाड़ी में भरकर निस्तारण के लिये ले जाया जाता है. नियमानुसार कचरे को उसी दिन हटाया जाता चाहिए.
मनीष शर्मा, सीएमएचओ, भोपाल
इस मामले में जीएमसी डीन कविता एन. सिंह से भी संपर्क की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो सकी.
