अर्चना चिटनिस ने उठाया पंढरपुर स्थित मध्यप्रदेश सदन के पुनर्संचालन का मुद्दा

बुरहानपुर। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी के पावन अवसर परए जब मध्यप्रदेश,महाराष्ट्र सहित देशभर से लाखों वारकरी श्रद्धालु भगवान श्री वि_ल.रुक्मिणी के दर्शन के लिए पंढरपुर में एकत्रित हैं और अनेक श्रद्धालु एक माह तक पैदल यात्रा कर पंढरपुर पहुंचते हैं, ऐसे समय मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने वारकरी श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषय को सदन में प्रमुखता से उठाया।

श्रीमती चिटनिस ने नियम 138,1 के अंतर्गत ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से महाराष्ट्र के पंढरपुर स्थित मध्यप्रदेश सदन के संरक्षण,जीर्णोद्धार, पुनर्संचालन एवं उसे मध्यप्रदेश पर्यटन सूचना एवं सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की मांग रखते हुए कहा कि यह केवल एक भवन का विषय नहीं,बल्कि लाखों वारकरी श्रद्धालुओं की आस्थाए सुविधा और सम्मान से जुड़ा विषय है।

उन्होंने सदन को बताया कि वर्ष 2003 में मध्यप्रदेश शासन द्वारा पंढरपुर आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सदन की स्थापना की गई थी। लेकिन वर्षों से पर्याप्त रखरखाव नहीं होने के कारण भवन जर्जर स्थिति में पहुंच गया और वर्तमान में उसका समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। जबकि प्रतिवर्ष मध्यप्रदेश के हजारों.लाखों श्रद्धालु भगवान श्री वि_ल के दर्शन के लिए पंढरपुर पहुंचते हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षितए व्यवस्थित और सम्मानजनक आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है।

श्रीमती चिटनिस ने बताया कि उनके सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप विभाग द्वारा संयुक्त संचालक पी.एस.मालवीय के नेतृत्व में 8 सदस्यीय अंतरविभागीय निरीक्षण दल का गठन कर स्थल निरीक्षण कराया गया। निरीक्षण दल ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में अनुशंसा की है कि आवश्यक मरम्मत एवं जीर्णोद्धार के बाद मध्यप्रदेश सदन का पुन: संचालन किया जा सकता है। साथ ही यह सुझाव भी दिया गया है कि भवन का संचालन निर्धारित शर्तों के अनुरूप किसी सक्षम स्थानीय संस्था के माध्यम से किया जाए, जबकि भवन का स्वामित्व मध्यप्रदेश शासन के पास ही रहे, ताकि नियमित रखरखाव एवं बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित हो सकें।

ध्यानाकर्षण के माध्यम से श्रीमती चिटनिस ने सरकार से मांग की कि मध्यप्रदेश सदन का शीघ्र जीर्णोद्धार कर उसे आधुनिक सुविधाओं से युक्त मध्यप्रदेश पर्यटन सूचना एवं सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।

उन्होंने कहा कि इससे न केवल वारकरी श्रद्धालुओं एवं अन्य यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि मध्यप्रदेश के धार्मिकए सांस्कृतिक एवं पर्यटन स्थलों का प्रभावी प्रचार.प्रसार भी होगा और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी।

इस विषय पर उत्तर देते हुए संस्कृति,पर्यटन,धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी ने सदन को आश्वस्त किया कि मध्यप्रदेश सदन के निर्माण एवं समय.समय पर मरम्मत के लिए विभाग द्वारा राशि स्वीकृत की जाती रही है।

निरीक्षण दल की विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद भवन के रखरखाव, मरम्मत और यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भवन का संचालन विभाग के स्वामित्व एवं नियंत्रण में रखते हुए निर्धारित व्यवस्था के अनुसार किया जाएगा।

श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि आषाढ़ी यात्रा के दौरान पंढरपुर पहुंचने वाले मध्यप्रदेश के लाखों वारकरी श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार निरीक्षण दल की अनुशंसाओं के अनुरूप शीघ्र निर्णय लेकर मध्यप्रदेश सदन का पुनर्संचालन सुनिश्चित करेगी, जिससे श्रद्धालुओं को सम्मानजनक आवास, बेहतर सुविधाएं एवं मध्यप्रदेश की सेवा भावना का अनुभव प्राप्त होगा।

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