इंदौर: शहर में नीट पेपर लीक सहित कई भर्ती परीक्षाओं में धांधली से प्रभावित बच्चों की क्या सुनवाई होगी? यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि पिछले 15 दिनों से ज्यादा समय से शहर में प्रभावित बच्चें अपने हक की लड़ाई के लिए धरना एवं अनशन आंदोलन कर रहे है. भंवरकुआ चौराहे पर टांटिया भील की प्रतिमा पर गांधीवादी तर्क से सरकार से अपनी मांगों को मनवाने के लिए बैठे हैं.
नीट पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में धांधली और घोटालों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं वैज्ञानिक सोनम वांगचुंग को कल जंतर मंतर से दिल्ली पुलिस से जबरन उठाकर अस्पताल भेज दिया. इसके बाद देशभर में उक्त मुद्दे को लेकर कई शहरों में छात्र छात्राओं ने कैंडल मार्च से लेकर रैली निकालने तक केंद्र सरकार खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया है. नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग अब देश के कई शहरों से होकर छोटे शहरों और गांव तक पहुंच चुकी है.
परीक्षाओं में धांधली से प्रभावित बच्चों ने अब आरपार की लड़ाई लड़ने की ठान ली है. बच्चों को कई सामाजिक कार्यकर्ता और संस्थाओं से सहयोग मिल रहा है. शहर के भंवरकुआ चौराहे पर टांटिया भील प्रतिमा स्थल पर भी सैकड़ों की संख्या में प्रभावित छात्र छात्राओं ने डेरा डाल रखा है. सैंकड़ों विद्यार्थी दिन रात मच्छरों और अन्य परेशानियों के बीच भी डटे हुए है.
छात्र छात्राओं ने परीक्षाओं में धांधली के दोषी पर कार्रवाई करने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने की मांग तक आंदोलन करने की तैयारी कर रखी है. मौके पर विद्यार्थियों की पीड़ा से नजर आ रहा है कि शिक्षा तंत्र में बहुत बड़ी गड़बड़ी है. इसको इससे समझा जा सकता है कि बच्चों के सहयोग हेतु धर्म जाति से ऊपर उठकर कई तरह से शहर के सक्षम महानुभावों द्वारा खुलकर मदद की जा रही है. बच्चों को पूरा सहयोग करने का आश्वासन देने के पीछे वे पीड़ित परिवार और देश के भविष्य की चिंता करने वालों की एक जमात मौजूद है, जिनको सामाजिक संस्थाओं और संगठन माना जाता है.
