
रतलाम। गौ माता को संवैधानिक रूप से ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। देशव्यापी ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत 27 जुलाई को जिलेभर के संतों, गौभक्तों और सामाजिक संगठनों की मौजूदगी में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम 32 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा जाएगा। अभियान से जुड़े संतों का कहना है कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए 27 अक्टूबर को राजधानी में भी ज्ञापन दिया जाएगा।
रतलाम में आयोजित प्रेस वार्ता में क्रांतिकारी संत स्वामी गौशरणानंद सरस्वती जी महाराज ने अभियान की रूपरेखा साझा करते हुए कहा कि गौ माता केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था की आधारशिला हैं। इसलिए उन्हें संवैधानिक रूप से ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि इससे पहले 27 अप्रैल को भी प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन भेजा गया था। तीन महीने तक मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं होने के बाद अब दूसरे चरण का अभियान शुरू किया जा रहा है। इसके तहत 27 जुलाई को रतलाम में संगठित प्रदर्शन के बाद ज्ञापन सौंपा जाएगा, जबकि आगे की रणनीति के तहत 27 अक्टूबर को राजधानी में भी आंदोलन की आवाज बुलंद की जाएगी।
अभियान के तहत प्रस्तुत किए जाने वाले 32 सूत्रीय मांग पत्र में गौ माता को ‘राष्ट्र माता’ घोषित करने, पूरे देश में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए कठोर केंद्रीय कानून बनाने, प्रत्येक जिले में आधुनिक गौ अभयारण्य और गौ-चिकित्सालय स्थापित करने सहित गौवंश के संरक्षण, संवर्धन और स्वावलंबन से जुड़ी कई मांगें शामिल हैं।
स्वामी गौशरणानंद सरस्वती जी महाराज ने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है। उनका कहना था कि यह अभियान भारतीय संस्कृति, परंपरा और गौ संरक्षण से जुड़े प्रत्येक नागरिक का अभियान है। उन्होंने जिले के साधु-संतों, सामाजिक संगठनों, युवाओं, मातृशक्ति और गौसेवकों से 27 जुलाई को अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर अभियान को सफल बनाने की अपील की।
