नई दिल्ली: करीब 30 वर्ष पहले माउंट एवरेस्ट अभियान के दौरान लापता हुए भारतीय पर्वतारोही दोरजे मोरुप का पार्थिव शरीर अब स्वदेश लाया जाएगा। वर्ष 1995 में एवरेस्ट अभियान के दौरान खराब मौसम और भीषण बर्फीले तूफान में फंसने के बाद उनका संपर्क टूट गया था। हाल ही में विशेष पर्वतारोहण और रिकवरी अभियान के दौरान उनका पार्थिव शरीर लगभग 26 हजार फीट की ऊंचाई पर एक गुफानुमा स्थान से बरामद किया गया। इस अभियान में विशेषज्ञ पर्वतारोहियों और संबंधित एजेंसियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
दोरजे मोरुप लद्दाख के रहने वाले थे और भारतीय पर्वतारोहण समुदाय में उनका विशेष सम्मान था। उनके पार्थिव शरीर की पहचान आवश्यक प्रक्रियाओं के बाद सुनिश्चित की गई। परिवार ने इतने वर्षों बाद अपने प्रियजन के पार्थिव शरीर के मिलने पर भावुक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संबंधित एजेंसियां सभी औपचारिकताएं पूरी कर पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया में जुटी हैं। इस अभियान को पर्वतारोहण इतिहास के सबसे कठिन रिकवरी अभियानों में से एक माना जा रहा है।
