जेल की दीवारों के पार भी ‘दबंगई’! वायरल वीडियो ने खोली सुरक्षा की पोल

रतलाम। शहर की सर्किल जेल एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। चाकूबाजी के मामले में गिरफ्तार होकर महज चार दिन पहले न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजे गए आरोपित बाबर पुत्र फिरदोस खान पठान का मुलाकात कक्ष के भीतर से बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।

वायरल वीडियो में बाबर मुलाकात कक्ष के पारदर्शी शीशे के पीछे बैठा इंटरकॉम के जरिए मुलाकाती से बातचीत करता दिखाई देता है। इसी दौरान बाहर मौजूद व्यक्ति ने मोबाइल फोन से उसका वीडियो रिकॉर्ड किया। वीडियो में बाबर कैमरे की ओर देखकर हाथ हिलाता है और उंगलियों से पिस्तौल जैसा इशारा करता नजर आता है। उसके हाव-भाव से स्पष्ट प्रतीत होता है कि उसे रिकॉर्डिंग की जानकारी थी। मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि जेल परिसर में मोबाइल फोन और किसी भी प्रकार की वीडियो रिकॉर्डिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद मुलाकात कक्ष तक मोबाइल पहुंचना और वहां से वीडियो रिकॉर्ड होकर सोशल मीडिया पर वायरल होना सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक की ओर इशारा करता है। वायरल वीडियो में आपत्तिजनक संवाद और अपराध का महिमामंडन करने वाला ऑडियो भी जोड़ा गया है, जिससे यह तेजी से इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।

वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया है, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इसे अपलोड करने वाला व्यक्ति वही है जिसने जेल परिसर में वीडियो रिकॉर्ड किया था या कोई अन्य। बाबर पठान स्टेशन रोड थाना क्षेत्र की शनि गली (हरमाला रोड) स्थित शराब दुकान के बाहर 10 जुलाई की रात हुई चाकूबाजी का मुख्य आरोपित है।

पुलिस ने उसे 14 जुलाई को इंदौर से गिरफ्तार किया था। उसकी निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद किया गया था। न्यायालय में पेशी के बाद उसे न्यायिक अभिरक्षा में सर्किल जेल भेजा गया था। इस मामले में एक महिला सहित एक अन्य आरोपित की तलाश अभी जारी है। उल्लेखनीय है कि रतलाम सर्किल जेल में वर्तमान में 640 बंदी निरुद्ध हैं, जिनमें 34 महिला बंदी भी शामिल हैं। ऐसे में जेल के भीतर से वायरल हुआ यह वीडियो केवल एक बंदी का मामला नहीं, बल्कि पूरी जेल सुरक्षा, निगरानी तंत्र और मुलाकात व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है।

 

घटना ने कई सवाल खड़े किए

 

घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जेल में मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित है तो रिकॉर्डिंग किसने और कैसे की? क्या सुरक्षा जांच में लापरवाही हुई या मुलाकात व्यवस्था में निगरानी कमजोर है? क्या वीडियो बनाते समय किसी कर्मचारी की नजर नहीं पड़ी? इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएंगे।

 

जांच के बाद होगी कार्रवाई

 

जेलर बृजेश मकवाना ने बताया कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में आया है। वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया, किसने बनाया और यह सोशल मीडिया तक कैसे पहुंचा, इसकी जांच कराई जा रही है। जांच में यदि बंदी या किसी अन्य की संलिप्तता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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