
सिंगरौली । सरई रेलवे स्टेशन के समीप स्थापित कोलयार्ड अब पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट का कारण बनता जा रहा है। कोयले के भंडारण और लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान उड़ने वाली धूल ने आसपास के वातावरण को प्रदूषित कर दिया है। हालात यह हैं कि लोगों के घरों, दुकानों, वाहनों और पेड़-पौधों तक पर कोयले की काली परत जम रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सुबह की ताजी हवा अब धूल और कालिख में बदल चुकी है तथा हर सांस के साथ बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।
कोयले की महीन धूल का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों पर पड़ रहा है। क्षेत्र के लोगों के अनुसार सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी, आंखों में जलन, एलर्जी और दमा जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लोगों का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से पूरा इलाका धूल की चपेट में है, लेकिन जिम्मेदार विभाग स्थिति सुधारने के बजाय मौन बने हुए हैं। कोलयार्ड का असर अब कृषि पर भी साफ दिखाई देने लगा है। आसपास के खेतों में खड़ी फसलों पर कोयले की धूल जमने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। किसानों का कहना है कि मिट्टी की उर्वरता लगातार घट रही है और कई एकड़ भूमि की उत्पादकता कम होती जा रही है। इससे उनकी आजीविका पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
हड़ताल, ज्ञापन व प्रदर्शन बेअसर
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर परिषद क्षेत्र में कोलयार्ड स्थापित करने से पहले जनहित और पर्यावरणीय प्रभावों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया। क्षेत्रवासियों ने इस समस्या के समाधान के लिए कई बार धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन, हड़ताल और रेल रोको आंदोलन किए, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। लोगों का कहना है कि सरई रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म क्रमांक-2 को बंद कर कोलयार्ड बनाए जाने के बाद घनी आबादी वाला पूरा क्षेत्र प्रदूषण की चपेट में आ गया है। नागरिकों ने शासन-प्रशासन से कोलयार्ड में प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था लागू करने अथवा इसे आबादी से दूर स्थानांतरित करने की मांग की है, ताकि लोगों को स्वच्छ हवा और सुरक्षित वातावरण मिल सके।
