श्रीनगर, 18 जुलाई (वार्ता) पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष एवं जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के नेशनल कॉन्फ्रेंस के आमंत्रण को ठुकरा दिया है। श्रीमती मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि केवल पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग करना ‘विश्वासघात’ होगा। उन्होंने अपने पत्र में लिखा, “पीडीपी के लिए ऐसे विरोध प्रदर्शन में भाग लेना किसी भी तरह से उचित नहीं होगा, जिसका एकमात्र और विशेष उद्देश्य सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग करना है।
जम्मू-कश्मीर के लोगों की बड़ी आकांक्षाओं को महज राज्य का दर्जा बहाल करने की छोटी और नुकसानदेह मांग तक सीमित कर देना एक बेहद अन्यायपूर्ण, अहितकारी और सरासर विश्वासघाती कदम होगा। केवल राज्य के दर्जे के लिए मिलकर प्रदर्शन करना जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने के गैर-कानूनी कदम को सही ठहराने जैसा है। इसे हमारे इतिहास के सबसे काले दिन, यानी पांच अगस्त के सीधे समर्थन के रूप में देखा जायेगा।” पीडीपी प्रमुख ने कहा है कि अनुच्छेद 370 मुख्य मुद्दा है और इसे छोड़ना 2019 में किये गये संवैधानिक बदलावों पर पर्दा डालने और उन्हें सामान्य मानने जैसा होगा। उन्होंने कहा, “यह अधूरे मन से की जा रही मांग न केवल अनुच्छेद 370 को ठंडे बस्ते में डालने के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के घृणास्पद नैरेटिव को दोहराती और वैध बनाती है, बल्कि यह पांच अगस्त 2019 को गुपचुप तरीके से की गयी अवैध और असंवैधानिक आत्मघाती कार्रवाई पर पर्दा डालने का जोखिम भी उठाती है।”
उन्होंने कहा, “आपकी पार्टी को जो भारी जनादेश मिला था, वह केवल राज्य का दर्जा बहाल करने में मदद के लिए नहीं था। अगर ऐसा होता, तो भाजपा और उसके सहयोगियों को कहीं अधिक चुनावी सफलता मिलती।” जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को भावनात्मक मुद्दा बताते हुए उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर पांच अगस्त 2019 के संवैधानिक बदलावों को सामान्य रूप में स्वीकार करने का आरोप लगाया। श्रीमती मुफ्ती ने डॉ अब्दुल्ला को लिखे पत्र में लिखा है, “कश्मीर के सबसे वरिष्ठ नेता के रूप में, मुझे पूरा विश्वास है कि आप हमारे लोगों के लिए अनुच्छेद 370 के न केवल भावनात्मक, बल्कि व्यावहारिक महत्व को भी समझते हैं। यही कारण है कि पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस सहित कश्मीर के प्रमुख क्षेत्रीय दलों ने 2024 के चुनावों के लिए अपने घोषणापत्रों में अनुच्छेद 370 की बहाली को एक मुख्य एजेंडे के रूप में शामिल किया था।”
उन्होंने लिखा, “आपने इस राज्य के लोगों को आश्वासन दिया था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे और निहित शक्तियों को बहाल करने के लिए लड़ेगी। लोगों ने आपकी बात पर भरोसा किया और एनसी के घोषणापत्र तथा अनुच्छेद 370 के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष के इसके वादे पर अपना विश्वास जताया।” यह कहते हुए कि नेशनल कांफ्रेेंस 2019 में जम्मू-कश्मीर में किये गये बदलावों पर पर्दा डाल रही है उन्होंने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली के लिए एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “फिर भी, सरकार बनाने के दो वर्ष बाद भी, मैंने गहरी चिंता और बेचैनी के साथ देखा है कि कैसे एनसी ने जम्मू-कश्मीर के बड़े राजनीतिक संघर्ष को राज्य के दर्जे के संकीर्ण और सिमटते नैरेटिव तक सीमित कर भाजपा के एजेंडे को सामान्य बनाना और उस पर पर्दा डालना शुरू कर दिया है।”
उन्होंने कहा, “हमें दलीय राजनीति से ऊपर उठना होगा और अनुच्छेद 370 के लिए लड़ने के लिए एक साथ आना होगा। इसके बिना किसी भी चीज की मांग करना हमारे अधिकारों और गरिमा के शर्मनाक आत्मसमर्पण जैसा होगा और एक अक्षम्य टिप्पणी होगी, जो जम्मू-कश्मीर के इतिहास में हममें से प्रत्येक को दोषी ठहरायेगी।”
श्रीमती महबूबा ने पहले कदम के रूप में सभी राजनीतिक दलों और नागरिक समाज के सदस्यों की बैठक बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा, “ईमानदार और सार्थक राजनीतिक प्रक्रिया तभी शुरू हो सकती है, जब मौलिक मुद्दों का समाधान किया जाये, जिसमें राजनीतिक बंदियों की रिहाई की मांग करना और जमात-ए-इस्लामी सहित सामाजिक-राजनीतिक संगठनों पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग करना शामिल है।” उन्होंने कहा, “यहां तक कि राज्य का दर्जा बहाल करने को भी एक बार की घटना के रूप में नहीं देखा जा सकता, इसके लिए निरंतर राजनीतिक प्रयास और जुड़ाव की आवश्यकता है, जिसे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला साहब को शुरू करना चाहिए।” नेशनल कांफ्रेंस के बागी नेता आगा रुहुल्लाह मेहदी और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के सज्जाद लोन के बाद श्रीमती मुफ्ती जम्मू-कश्मीर की तीसरी ऐसी नेता हैं, जो जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों में शामिल नहीं हो रही हैं। कांग्रेस और माकपा हालांकि पहले ही कह चुके हैं कि वे 20 जुलाई को होने वाले विरोध प्रदर्शन और धरने में शामिल होंगे। कांग्रेस महासचिव गुलाम अहमद मीर ने अन्य राजनीतिक दलों से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील करते हुए कहा है कि राज्य का दर्जा बहाल करना जनता का मुद्दा है, न कि किसी विशेष राजनीतिक दल का।

