
दमोह। सांस्कृतिक स्रोत व प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी), क्षेत्रीय केंद्र, दमोह (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा 08 से 17 जुलाई, 2026 तक आयोजित “विद्यालयी शिक्षा में हस्तकला कौशल का समावेश” विषयक 10 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यशाला में देश के 08 राज्यों से 51 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सहभागिता की।समापन समारोह के मुख्य अतिथि श्री भाव सिंह, वरिष्ठ समाजसेवी रहे। उन्होंने शिक्षकों द्वारा तैयार किए गए लेसन प्लान, क्राफ्ट सामग्री एवं वर्कशीट का अवलोकन कर उनकी सराहना की। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि “शिक्षक समाज की रीढ़ हैं और उनके माध्यम से ही राष्ट्र का भविष्य निर्मित होता है।” उन्होंने इसे मध्यप्रदेश एवं दमोह के लिए गौरव का विषय बताया कि देश के विभिन्न राज्यों के शिक्षक सीसीआरटी क्षेत्रीय केंद्र, दमोह में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।इस अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा सभी 51 प्रतिभागी शिक्षक-शिक्षिकाओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
आशुतोष शर्मा, उपनिदेशक (कार्यशाला) के निर्देशन में देवनारायण रजक, क्षेत्राधिकारी ने कार्यशाला के उद्देश्य, सीसीआरटी की गतिविधियों तथा विद्यालयी शिक्षा में हस्तकला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सीसीआरटी के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदूलकर एवं निदेशक श्री पप्पुंजय कुमार के मार्गदर्शन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण शिक्षकों को हस्तकला आधारित शिक्षण को विद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू करने में सहायक सिद्ध होगा।
