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बड़वानी। 12 जुलाई को अंतिम शुभ विवाह मुहूर्त के साथ ही शहनाइयों की गूंज थम गई। अब लगभग चार माह तक जिले में विवाह सहित अधिकांश मांगलिक कार्य नहीं होंगे। 12 जुलाई को जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में समारोह की रौनक देखने को मिली। बाजारों में भी कपड़े, आभूषण, उपहार, टेंट, कैटरिंग और अन्य विवाह सामग्री की खरीदारी जोरों पर रही।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 25 जुलाई देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ होगा। इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं। इसलिए विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत, मुंडन सहित अन्य मांगलिक संस्कार नहीं किए जाते। अब 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ चातुर्मास समाप्त होगा और फिर से विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू होंगे। एक बार फिर शहनाइयों की गूंज और विवाह समारोहों की रौनक लौटेगी।
जिले में विवाह सीजन समाप्त होने के साथ ही शादी से जुड़े कारोबार की रफ्तार भी धीमी पडऩे लगी है। कारोबारियों के यहां अब अगले चार माह तक ग्राहकी सीमित रहेगी।
पंडित नवीन शर्मा ने बताया कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और संसार का संचालन भगवान शिव करते हैं। जिस वजह से इस अवधि में पूजा-पाठ, जप, तप, व्रत और धार्मिक साधना को विशेष महत्व दिया जाता है और विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्य पर रोक रहती है। इस वर्ष गुरु अस्त की अवधि भी है, जिससे शुभकार्यों पर विराम रहेगा।
