यरुशलम , 25 फरवरी (वार्ता) इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत तथा इज़राइल के संबंधों को दोनों देशों के उत्साह ओर क्षमता को कई गुना बढ़ाने वाला गठबंधन बताते हुए भारत के साथ विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को विस्तार देने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
श्री नेतन्याहू ने कहा कि इज़राइल और भारत आज मिल कर एक नया इतिहास रच रहे हैं।
श्री नेतन्याहू ने बुधवार को अपनी संसद नेसेट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्वागत करते हुए श्री मोदी को अपने मित्र से भी बढ़ कर अपना भाई बताया और अपने देश तथा यहूदी लोगों का निरंतर समर्थन करने के लिए का दिल की गहरायइयों से आभार प्रकट किया।
नेसेट में श्री मोदी के संबोधन से पहले बोलते हुए श्री नेतन्याहू ने भारतीय प्रधानमंत्री को ‘इज़राइल का एक बड़ा दोस्त और विश्व के राजनीतिक मंच का एक बड़ा नेता बताते हुए उनके स्वागत में कहा, ‘ मेरे प्यारे दोस्त मैं आप के इज़राइल आगमन से अत्यंत भावुक हूं।आप मेरे लिए मित्र से भी बढ़ कर हैं… मेरे भाई है।”
उन्होंने नौ साल पहले श्री मोदी की पिछली यात्रा के दौरान समुद्र के पानी में खड़े होकर उनके साथ के पलों को याद करते हुए कहा, ” कुछ लोगों ने इसकी आलोचना में बहुत कुछ कहा था लेकिन उसके बाद से हमने अपने व्यापार को दो गुना किया है , हमारा सहयोग तीन गुना बढ़ा है।”
श्री नेतन्याहू ने बार बार सांसदों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच श्री मोदी को —इज़राइल के एक महान मित्र, भारत-इज़राइल गठबंधन के प्रबल समर्थक, और विश्व मंच के एक महान नेता के रूप में संबोधित करते हुए कहा … “मुझे आपसे कहना होगा, नरेंद्र, मेरे प्रिय मित्र, आज यहाँ आपकी इस यात्रा से मैं अत्यंत, अत्यंत भावुक हूँ। कूटनीतिक मर्यादा के कारण मैं इसे क्रम में नहीं रखूँगा, क्योंकि तब मैं मुश्किल में पड़ जाऊँगा। लेकिन सच कहूँ तो, आपकी इस यात्रा से अधिक मैं कभी प्रभावित नहीं हुआ।”
उन्होंने कहा, ” (प्रधानमंत्री मोदी) यरूशलेम में आपका स्वागत है, मेरे प्रिय मित्र, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, और आपके विशिष्ट प्रतिनिधिमंडल का भी स्वागत है। यरूशलेम में आपका स्वागत है। और जब मैं कहता हूँ, “नरेंद्र, मेरे प्रिय मित्र,” तो ये केवल शब्द नहीं हैं। मैं तो लगभग यह कहने का साहस करूँगा—मित्र से भी बढ़कर, एक भाई। अनेक अर्थों में, हम भाई हैं।”
उन्होंने कहा, ‘ जब आप पिछली बार यहाँ आए थे, हम दोनों भूमध्यसागर के तट पर थे। मैंने कहा था, क्यों न हम अपने जूते उतारकर पानी में उतरें—उस पानी में, जिसे हम शुद्ध करना चाहते थे—और हमने ऐसा किया, इज़राइली तकनीक के साथ।”
उन्होंने कहा, ‘ हमारे ईसाई मित्रों के प्रति विनम्र सम्मान के साथ, कुछ लोगों ने कहा कि हम पानी में चले नहीं, बल्कि पानी पर चले। यह सच नहीं है। हम पानी पर नहीं चले, लेकिन उसके बाद से हमने चमत्कार अवश्य किए हैं।…हमने अपने व्यापार को दोगुना किया है, अपने सहयोग को तिगुना किया है, और अपनी समझ को चौगुना किया है—ऐसे तरीकों से जिन्हें मैं पूरी तरह वर्णित भी नहीं कर सकता, और शायद करना भी नहीं चाहिए। लेकिन यह एक अद्भुत मित्रता रही है—व्यक्तिगत रूप से हमारे बीच, और हमारे दोनों देशों तथा हमारे दोनों जनों के बीच।”
उन्होंने कहा ” आज सुबह मेरी पत्नी सारा और मैंने हवाई अड्डे पर आपका स्वागत किया। जैसे ही आप सीढ़ियों से नीचे उतरे, हमने एक-दूसरे को गले लगाया। क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी का व्यक्तिगत आलिंगन कुछ विशेष है—इसे “मोदी हग” कहा जाता है। यह विश्वभर में प्रसिद्ध है।”
उन्होंने कहा, ‘जब आप किसी को सच्चे मन से गले लगाते हैं, तो पता चलता है कि वह औपचारिकता नहीं, बल्कि सच्ची भावना है। इसे “मोदी हग” कहते हैं। और मैं यहाँ केनेस्सेट के प्रत्येक सदस्य की ओर से भी आपको वही आलिंगन लौटाना चाहता हूँ। यह केवल हमारे व्यक्तिगत संबंधों का प्रतीक नहीं है, बल्कि हमारे दोनों राष्ट्रों के बीच की आत्मीयता का भी प्रतीक है।’
प्रधानमंत्री ने कहा , ‘भारत, जैसा कि आप जानते हैं, लगभग डेढ़ अरब लोगों का एक विराट राष्ट्र है। इज़राइल आकार में छोटा है, पर आत्मा और कर्म में उतना ही महान है—चमत्कार करने में सक्षम। हमारा गठबंधन हमारी व्यक्तिगत शक्तियों को कई गुना बढ़ाने वाला है— हमारे उत्साह हमारे काम व हमारे सामर्थ्य को भी बढ़ाने वाला है।”
श्री नेतन्याहू ने भारत और इज़राइल को विश्व को हजारों वर्ष पुरानी सभ्यताओं के विकास का पालना बताते हुए कहा, ‘ हजारों वर्षों पुरानी। यदि आप देखें कि मानव सभ्यता का विकास कहाँ हुआ, तो कुछ ही स्थान प्रमुख थे—उनमें से एक सिंधु घाटी और दूसरा जॉर्डन घाटी। यहाँ आध्यात्मिक, वैचारिक, नैतिक और बौद्धिक विकास के महान स्रोत फूटे।”
उन्होंने कहा , “हम दोनों ने समय की लंबी यात्रा में अनेक परीक्षाएँ झेलीं। लगभग 80 वर्ष पूर्व, हम दोनों ने लगभग एक ही समय में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की। हम दोनों लोकतंत्र हैं। आप एक विशाल लोकतंत्र हैं। इज़राइल ने भी असाधारण चुनौतियों के बीच अपने लोकतंत्र को बनाए रखा है—ऐसी चुनौतियाँ, जिनका सामना शायद ही किसी अन्य देश ने किया हो। आज हम अपने गहरे और रणनीतिक गठबंधन को और सुदृढ़ कर रहे हैं। हम एक ही पक्ष में खड़े हैं। इज़राइल पहले से अधिक सशक्त है, और भारत भी पहले से अधिक सशक्त है।”
इज़राइली प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में आपके नेतृत्व में भारत ने सुधार, अवसंरचना, रोजगार, स्वास्थ्य, कृषि, कल्याण, जीवन-स्तर, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और नवाचार में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने श्री मोदी की ओर रुख करते हुए कहा, ‘ आपने कहा था, “आकाश ही सीमा है।” और सचमुच, भारत अंतरिक्ष शक्ति बन चुका है—विश्व की अग्रणी शक्तियों में से एक।भारत ने स्वयं को एशिया के सिंह के रूप में स्थापित किया है—जो आगे बढ़ रहा है, अधिक विकास, अधिक प्रगति, अधिक समृद्धि की ओर।’
उन्होंने ‘7 अक्टूबर’ के भयानक नरसंहार का जिक्र करते हुए कहा कि उसके ‘ तुरंत बाद, आपने स्पष्ट और नैतिक स्वर में इज़राइल का समर्थन किया। आपने कोई संकोच नहीं किया, कोई बहाना नहीं बनाया। आप इज़राइल के साथ खड़े रहे। सत्य के साथ खड़े रहे।आज इज़राइल सभ्यता की अग्रिम पंक्ति पर खड़ा है—कट्टरपंथी इस्लाम के विरुद्ध। और यह संघर्ष केवल हमारा नहीं, बल्कि समूची मानवता के भविष्य का संघर्ष है।”
उन्होंने कहा, ‘जब हम मुंबई गए थे, हम उस प्रसिद्ध होटल में गए जहाँ आतंकवादी हमला हुआ था। वहाँ से हम चाबाद केंद्र तक पैदल गए, जहाँ आतंकवादियों ने एक दंपति की हत्या कर दी थी। उनके छोटे पुत्र मोशे को उसकी भारतीय आया ने बचाया। हम इसे कभी नहीं भूलेंगे। भारत इज़राइल का समर्थन करता है, और इज़राइल भारत का समर्थन करता है—चाहे वह प्रसिद्ध घटनाएँ हों या कम जानी-पहचानी।
उन्होंने कहा , ‘ कट्टरपंथी ताकतों के विरुद्ध हम मिलकर एक “स्टील यूनियन” बनाएँगे—ऐसे देशों का संघ, जो जीवन का सम्मान करते हैं और मानव गरिमा के लिए खड़े होते हैं।अगले सप्ताह हम पुरीम मनाएँगे, और यहूदी लोग एस्तेर की पुस्तक पढ़ेंगे। उसमें भारत का उल्लेख प्राचीन फारसी साम्राज्य के संदर्भ में आता है। पीढ़ियों से भारत में यहूदी समुदाय रहे हैं। स्वतंत्रता के बाद अनेक भारतीय यहूदी इज़राइल आए। हाल ही में हमने मनशे समुदाय के कुछ सदस्यों को इज़राइल लाने का निर्णय लिया।”
उन्होंने कहा, ‘ भारत के महान कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने भी हमारे राष्ट्रीय आंदोलन के प्रति सकारात्मक विचार व्यक्त किए थे। उनके लेखन का हिब्रू में अनुवाद हुआ। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हाइफ़ा की लड़ाई में भारतीय सैनिकों ने वीरता दिखाई। उन्होंने हमारे लिए अपने प्राण दिए। हम इसे कभी नहीं भूलते। भारत और इज़राइल के बीच पूर्ण राजनयिक संबंधों के बाद से हमारे संबंध और मजबूत हुए हैं। हर वर्ष हजारों इज़राइली युवा भारत की आधुनिकता और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत से सीखने भारत जाते हैं।”
श्री नेतन्याहू ने कहा, ‘मैं भी पुनः भारत आना चाहता हूँ—और मैं यह घोषित करता हूँ कि हम इज़राइली सरकार के साथ भारत की यात्रा करेंगे। हम सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, साइबर, नवाचार और अंतरिक्ष में सहयोग को और आगे बढ़ाएँगे। हम ” भारत-पश्चिम एशिया- यूरोप व्यापार गलियारा” पहल पर साथ काम कर रहे हैं—एक समुद्री और स्थलीय गलियारा, जो भारत को अरब प्रायद्वीप के माध्यम से हाइफ़ा बंदरगाह से जोड़ेगा और वहाँ से भूमध्यसागर और यूरोप तक।यह गलियारा तभी सफल होगा जब यह स्थिर और सुरक्षित देशों से गुजरेगा—और इस मार्ग पर भारत और इज़राइल से अधिक स्थिर व सुरक्षित देश नहीं हैं। हम पर्यटन, संस्कृति, कृषि, जल प्रबंधन और सिंचाई में भी नए समझौते करेंगे, और अब्राहम समझौतों की भावना में क्षेत्रीय स्थिरता और शांति को आगे बढ़ाएँगे।
उन्होंने अपने संबोधन की समाप्ति पर कहा, “मेरे मित्र नरेंद्र, भारत के प्रधानमंत्री—हम साथ मिलकर इतिहास रच रहे हैं।”
