नई दिल्ली, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा बन गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने यमन के हूती विद्रोही संगठन को लाल सागर के महत्वपूर्ण तेल मार्ग को बाधित करने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है। हूतियों ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास मिसाइलें और ड्रोन तैनात कर दिए हैं, जिससे यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के साथ-साथ यह मार्ग भी बंद होता है, तो दुनिया भर में ईंधन की भारी किल्लत पैदा हो सकती है।
वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहराता संकट
पश्चिम एशिया के इन दोनों प्रमुख तेल निर्यात मार्गों के अस्थिर होने से वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं। ईरान समर्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रतिनिधियों द्वारा इस मार्ग को बंद करने का निर्णय लेने की खबरें क्षेत्र में दहशत पैदा कर रही हैं। सऊदी अरब पर हूतियों द्वारा किए गए हालिया मिसाइल हमलों ने चार साल पुराने संघर्षविराम को भी तोड़ दिया है, जिससे मध्य पूर्व में युद्ध का दायरा लगातार विस्तृत होता जा रहा है।
भारत पर पड़ेगा सीधा असर
इस भू-राजनीतिक संघर्ष का भारत पर सीधा और नकारात्मक प्रभाव पड़ने की प्रबल संभावना है। यदि ईंधन की वैश्विक आपूर्ति बाधित होती है, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में फिर से भारी वृद्धि हो सकती है। इससे पहले से ही बढ़ रही खुदरा और थोक महंगाई को और अधिक रफ्तार मिल सकती है। ईंधन महंगा होने से न केवल आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ेगा, बल्कि देश का आयात-निर्यात व्यापार भी गंभीर रूप से प्रभावित होगा।

