भोपाल की पहली अंतरिक्ष अन्वेषण गैलरी, अब Space सिर्फ किताबों में नहीं!

दीपक तिवारी

भोपाल: क्या आपने कभी सोचा है कि…ब्रह्मांड की शुरुआत कैसे हुई?
Astronaut अंतरिक्ष में कैसे रहते हैं?
और… क्या इंसान सच में एक दिन मंगल पर बस पाएगा?
इन सभी सवालों के जवाब अब किताबों में नहीं… बल्कि भोपाल की नई अंतरिक्ष अन्वेषण गैलरी में मिलेंगे।
भोपाल के आंचल विज्ञान केंद्र में शुरू हुई मध्य प्रदेश की पहली Space Exploration Gallery… जहां ISRO की प्रेरणादायक यात्रा से लेकर भविष्य की Space Economy तक… सब कुछ बेहद दिलचस्प तरीके से दिखाया गया है।
यहां आपको 1963 में ISRO की उस विनम्र शुरुआत की झलक मिलेगी… जब रॉकेट के पुर्जे साइकिल पर ले जाए जाते थे… और वहीं से शुरू हुआ सफर आज चंद्रयान-3 तक पहुंच चुका है।
Gallery में आगे बढ़ते ही ब्रह्मांड की उत्पत्ति, सौरमंडल, पृथ्वी के बनने की कहानी और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के योगदान को बेहद आकर्षक तरीके से दिखाया गया है।
यह सिर्फ देखने की जगह नहीं… बल्कि समझने और महसूस करने का अनुभव है।
यानी अगर आपके घर में बच्चे हैं… या आपको खुद Space और Science में रुचि है… तो यह गैलरी आपके लिए किसी Discovery Tour से कम नहीं है। इस गैलरी में एक खास जगह है जो बच्चों को बेहद पसंद आने वाली है और वह है स्पेस फ्लाइट सीमुलेटर. जहां बच्चे खुद रॉकेट को डिजाइन कर सकते हैं और उसे लॉन्च कर सकते हैं.
और यदि आपके रॉकेट में कुछ खामी होगी को सिस्टम तुरंत आपको इसकी जानकारी भी देगा ताकि आपका लॉन्च असफल न हो..
यानि…
यहां सिर्फ जानकारी नहीं मिलती…
बल्कि विज्ञान के प्रति जिज्ञासा भी पैदा होती है।
और अगर आप सोच रहे हैं कि इसके लिए अलग टिकट लगेगी…तो ऐसा बिल्कुल नहीं है।
अगर आप भी अंतरिक्ष को सिर्फ आसमान में नहीं… बल्कि करीब से महसूस करना चाहते हैं…
तो एक बार भोपाल के आंचल विज्ञान केंद्र जरूर जाइए। हो सकता है…
यहीं से किसी बच्चे के मन में अगला चंद्रयान, गगनयान या फिर भविष्य का कोई नया Space Mission जन्म ले ले।

 

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