पुरी, ओडिशा के पुरी में आज से भगवान श्री जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा का भव्य शुभारंभ हो गया है। हज़ारों साल पुरानी परंपरा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा आज अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए ‘श्रीमंदिर’ से बाहर निकलकर अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) की ओर प्रस्थान करेंगे। मूसलाधार बारिश के बावजूद, बड़दंडा (ग्रैंड रोड) पर देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ ‘हरि बोल’ और शंख ध्वनि के साथ भक्ति में लीन है।
दिव्य अनुष्ठान और देवताओं का आगमन
रथयात्रा के मुख्य अनुष्ठानों के तहत, देवताओं को पारंपरिक ‘पहंडी’ जुलूस के जरिए उनके भव्य रथों – नंदीघोष (जगन्नाथ), तलध्वज (बलभद्र), और दर्पदलन (सुभद्रा) पर विराजमान कराया जा रहा है। सुबह से ही विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान जैसे मंगला आरती, सूर्य पूजा और रथ प्रतिष्ठा संपन्न हुए। दोपहर में गजपति महाराज द्वारा ‘छेरा पहनरा’ (रथों की रस्मी सफाई) की रस्म पूरी की जाएगी, जिसके बाद तीनों रथ अपनी यात्रा पर निकलेंगे। प्रशासन ने सुरक्षा और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के प्रबंधन के लिए व्यापक इंतज़ाम किए हैं।
सांस्कृतिक विरासत और पीएम मोदी की शुभकामनाएँ
यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस शुभ अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं और इसे विनम्रता व सामूहिक भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। रथयात्रा के दौरान भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है, जहाँ लोग विविध वेशभूषा में भगवान के प्रति अपना समर्पण व्यक्त कर रहे हैं। यह सालाना प्रवास एकता और आपसी भाईचारे की भावना को और भी अधिक मजबूत करता है।

