नई दिल्ली, भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच ‘व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता’ (CETA) आज, 15 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से प्रभावी हो गया है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इसे भारत के व्यापारिक इतिहास का एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया है। यह समझौता पारंपरिक शुल्क कटौती से आगे बढ़कर डिजिटल व्यापार, नवाचार, सरकारी खरीद और लैंगिक समानता जैसे 30 आधुनिक विषयों को कवर करता है। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच तकनीकी बाधाओं को दूर करना और भारतीय व्यापारियों के लिए यूके के बाजार में नई राहें खोलना है।
घरेलू उद्योगों की सुरक्षा और निर्यात को प्रोत्साहन
भारत ने इस समझौते में अपने संवेदनशील घरेलू उद्योगों, जैसे डेयरी, अनाज, और आभूषणों को विशेष सुरक्षा प्रदान की है। वहीं, श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे कपड़ा, फुटवियर और चमड़ा उद्योग को अभूतपूर्व लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि यूके में इन पर लगने वाला 12 प्रतिशत आयात शुल्क अब शून्य हो गया है। इससे भारतीय निर्यात में तेजी आएगी और लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा, भारतीय किसानों को यूके के 90 बिलियन डॉलर के विशाल कृषि बाजार तक सीधी पहुंच प्राप्त होगी।
पेशेवरों के लिए ‘डबल कंट्रीब्यूशन’ से राहत
आईटी और सेवा क्षेत्र के लिए ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ (DCC) गेम चेंजर साबित होगा। अब यूके में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को वहां की राष्ट्रीय बीमा प्रणाली में दोहरा योगदान देने से मुक्ति मिलेगी, जिससे उन्हें सीधे वित्तीय लाभ होगा। यह सुविधा 75,000 से अधिक भारतीय श्रमिकों के लिए फायदेमंद होगी। व्यापार को सुगम बनाने के लिए ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ प्रणाली भी शुरू की गई है, जो कागजी कार्रवाई को न्यूनतम करेगी। यह समझौता न केवल व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

