ईरान युद्ध तेज होने के साथ ही अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति पर संकट के बादल

वॉशिंगटन, 13 जुलाई (वार्ता) अमेरिका के प्रमुख हथियारों के भंडार पर गहरा संकट गहरा रहा है, जो ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों के इसी रफ्तार से जारी रहने पर और बिगड़ सकता है। इससे दुनिया में अन्य जगहों पर भविष्य के संघर्षों से निपटने की उसकी क्षमता को लेकर चिंताएं बढ़ गयी हैं।
यह चेतावनी ऐसे समय में आयी है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को दोहराया कि ईरान के साथ युद्धविराम ‘समाप्त’ हो गया है, जिससे इस संघर्ष के जारी रहने की आशंकाओं को बल मिला है।सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि लंबे समय तक चलने वाले अभियानों से अन्य क्षेत्रों, विशेष रूप से हिंद-प्रशांत में अमेरिका की तैयारियों पर असर पड़ सकता है।

सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) के रक्षा विश्लेषक और मरीन कोर के सेवानिवृत्त कर्नल मार्क कैनसियन ने कहा, “युद्ध अगर पिछले पांच दिनों की रफ्तार से जारी रहता है, तो इससे हथियारों के भंडार में इतनी कमी आयेगी कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक नये और बड़े स्तर का खतरा पैदा हो जायेगा।” विश्लेषकों और पिछली रिपोर्टों के अनुसार, ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ युद्ध के शुरुआती चरण में अमेरिकी सेना ने हजारों सटीक-निशाना साधने वाले हथियारों और एयर डिफेंस इंटरसेप्टर का इस्तेमाल किया था।

ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन में विदेश नीति अनुसंधान के निदेशक माइकल ओ हैनलोन ने कहा कि इसमें “कोई संदेह नहीं’ है कि मौजूदा भंडार ‘हमारी पसंद की तुलना में काफी कम’ थे।सीएनएन के अनुसार, अप्रैल में जब पूर्ण स्तर की लड़ाई रुकी थी, तब तक पेंटागन ने कथित तौर पर अपने कम से कम आधे थॉड बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर, लगभग आधे पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर और लगभग 30 फीसदी टोमाहॉक लैंड-अटैक मिसाइलें खर्च कर दी थीं। इसके बाद हुए युद्धविराम से मिसाइलों की खपत की रफ्तार धीमी हो गयी, क्योंकि कम तीव्रता वाले हमलों में कम अमेरिकी हथियारों की जरूरत पड़ी।
श्री कैनसियन के अनुसार, आपूर्ति की भरपाई अब भी बहुत धीमी बनी हुई है, क्योंकि मौजूदा उत्पादन समय सारणी से संकेत मिलता है कि पेंटागन को हर महीने लगभग 15 टोमाहॉक मिसाइलें और 20 पैट्रियट इंटरसेप्टर मिलते हैं, जबकि 2026 के लिए वर्तमान में किसी भी थॉड की डिलीवरी का अनुमान नहीं है।

सीएसआईएस का अनुमान है कि हथियारों के भंडार को युद्ध से पहले के स्तर पर बहाल करने में तीन वर्ष या उससे अधिक समय लग सकता है। अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट की सीनियर फेलो और पेंटागन की पूर्व कार्यवाहक नियंत्रक ऐलेन मैक्कसकर ने कहा कि कई प्रमुख गोला-बारूद की भरपाई की समयसीमा वर्षों में मापी जायेगी। उन्होंने कहा, “अधिकतर गोला-बारूद की भरपाई में लगने वाला समय वर्षों में होगा—ज्यादातर के लिए दो से पांच वर्ष।”

अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के रक्षा अधिग्रहण विशेषज्ञ और अमेरिकी सेना के सेवानिवृत्त मेजर जनरल जॉन फेरारी ने ध्यान दिलाया कि कांग्रेस ने युद्ध के दौरान इस्तेमाल की गयी मिसाइलों को बदलने के लिए अभी तक विशेष फंड की मंजूरी नहीं दी है। श्री फेरारी ने कहा, “एक भी मिसाइल को बदलने के लिए कांग्रेस का एक डॉलर भी स्वीकृत नहीं किया गया है।” उन्होंने कहा कि वर्तमान में आपूर्ति की भरपाई सामान्य शांति काल की खरीद प्रक्रिया से आगे बढ़ रही है।

ह्वाइट हाउस ने ईरान संघर्ष से जुड़ी लागतों को पूरा करने के लिए कांग्रेस से अतिरिक्त फंड का अनुरोध किया है, हालांकि यह प्रस्ताव कैपिटल हिल में अनिश्चितता का सामना कर रहा है।
पेंटागन का दावा है कि उत्पादन क्षमता बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। रक्षा विभाग के अधिकारी ने कहा कि विभाग ‘रक्षा औद्योगिक आधार का तेजी से विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध’ है।राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिसाइल निर्माण में तेजी लाने और नियामक बाधाओं को दूर करने के प्रयास में जून में रक्षा उत्पाद अधिनियम लागू किया है। पेंटागन ने उत्पादन लाइनों के विस्तार के उद्देश्य से रक्षा ठेकेदारों के साथ समझौतों पर भी हस्ताक्षर किये हैं।

अधिकारी ने कहा, “बड़े पैमाने पर उत्पादन देने और आपूर्ति शृंखलाओं में मजबूती लाने के लिए विभाग अमेरिकी नवाचार की सर्वश्रेष्ठ तकनीकों को आक्रामक रूप से अपना रहा है।” ऐसे में अधिकारियों और विश्लेषकों ने आगाह किया है कि इन उपायों के बावजूद उत्पादन बढ़ाने में समय लगेगा।
श्री कैनसियन ने रक्षा उत्पाद अधिनियम के उपयोग को ‘मददगार’ बताया, लेकिन कहा कि इसका तात्कालिक प्रभाव संभवतः सीमित होगा। अमेरिका अंतरराष्ट्रीय उत्पादन साझेदारियों पर भी काम कर रहा है। श्री ट्रंप ने गुरुवार को घोषणा की कि यूक्रेन को घरेलू स्तर पर पैट्रियट मिसाइल प्रणालियों का निर्माण करने का लाइसेंस मिलेगा, जबकि जर्मनी भी उत्पादन क्षमता विकसित कर रहा है।
इस तरह के प्रयासों में हालांकि लंबा समय लगता है।

जापान को पैट्रियट मिसाइल बनाने की अपनी इकाई शुरू करने में ही तीन वर्ष लग गये, जबकि जर्मनी ने 2022 में काम शुरू करने के बावजूद अभी तक अपनी पहली पैट्रियट मिसाइल नहीं बनायी है।”
कुछ मिसाइलों के भंडार में तेजी से सुधार होने की उम्मीद है। सीएसआईएस के अनुसार, सटीक निशाना साधने वाली मिसाइलों और हवा से सतह पर मार करने वाली संयुक्त मिसाइलों का भंडार 2027 के मध्य या अंत तक युद्ध से पहले के स्तर पर वापस आ सकता है। श्री कैनसियन ने चेतावनी दी कि अमेरिका के लिए केवल चीन ही संभावित चिंता का विषय नहीं है,

क्योंकि उत्तर कोरिया से जुड़े किसी भी संभावित भविष्य के संघर्ष में उत्तर कोरिया के संभावित मिसाइल हमलों से अमेरिकी बलों और दक्षिण कोरिया की रक्षा करने के लिए बड़ी संख्या में सटीक-निशाना साधने वाले हथियारों और मिसाइल इंटरसेप्टर की आवश्यकता होगी। चिंताओं के बावजूद पेंटागन के अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी सेना भविष्य में ऐसी किसी भी संभावित आकस्मिक स्थिति के लिए परिचालन के स्तर पर तैयार है। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल ने कहा कि दुनिया भर में खतरों का जवाब देने के लिए अमेरिकी सेना के पास आवश्यक क्षमताएं मौजूद हैं।

श्री पार्नेल ने कहा, “अमेरिका की सेना दुनिया में सबसे शक्तिशाली है और उसके पास राष्ट्रपति के चुने समय और स्थान पर कार्रवाई करने के लिए आवश्यक सभी चीजें मौजूद हैं।” उन्होंने कहा, “हमने अपने लोगों और अपने हितों की रक्षा के लिए अमेरिकी सेना के पास क्षमताओं का विशाल भंडार सुनिश्चित करते हुए विभिन्न कॉम्बैटेंट कमांड में कई सफल अभियानों को अंजाम दिया है।” श्री ओ हैनलोन ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चीन या उत्तर कोरिया के खिलाफ अमेरिका की प्रतिरोधक क्षमता अब तक बहुत कमजोर हुई है। उन्होंने हालाकि आगाह किया कि हथियारों की लगातार कमी से अंततः अमेरिकी सैन्य ताकत के प्रति वैश्विक धारणा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा, “एक बिंदु पर आकर प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है। वह बिंदु कहां हो सकता है, यह मापना या जानना शायद असंभव है, क्योंकि यह काफी हद तक विरोधी की मानसिकता पर निर्भर करता है।”

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