नयी दिल्ली, 13 जुलाई (वार्ता) दिल्ली सरकार ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाणिज्यिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ‘नया सफर योजना’ को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
दिल्ली के परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने सोमवार को कहा कि यह योजना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) के माध्यम से लागू की जायेगी। इसका उद्देश्य बीएस-4 और उससे पुराने वाणिज्यिक वाहनों को स्वैच्छिक रूप से हटाकर उनकी जगह कम प्रदूषण फैलाने वाले आधुनिक वाहनों को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि इससे राजधानी में स्वच्छ वाणिज्यिक परिवहन को गति मिलेगी, वाहनों से होने वाला प्रदूषण कम होगा और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार आयेगा। साथ ही परिवहन संचालकों को अपने वाहन बेड़े का आधुनिकीकरण करने में भी सहायता मिलेगी।
उन्होंने कहा कि योजना के तहत पुराने ट्रकों और बसों को बदलकर बीएस-6 मानक और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने वाले वाहन मालिकों को टैक्स में छूट, पंजीकरण शुल्क में माफी और अन्य वित्तीय प्रोत्साहन दिये जायेंगे।
डॉ. सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार स्वच्छ हवा, आधुनिक परिवहन व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ‘नया सफर योजना’ न केवल प्रदूषण कम करने में मदद करेगी, बल्कि परिवहन क्षेत्र में हरित और टिकाऊ बदलाव का आधार भी बनेगी। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दिल्ली परिवहन विभाग, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और अन्य संबंधित एजेंसियां आवश्यक अधिसूचनाएं जारी करने तथा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने की दिशा में संयुक्त रूप से कार्य करेंगी।
योजना के तहत पात्र नये वाहनों पर 100 प्रतिशत मोटर वाहन कर में छूट, पात्र पुरानी (यूज्ड) गाड़ियों की खरीद पर 10 वर्षों तक 50 प्रतिशत कर छूट, पंजीकरण शुल्क में राहत तथा स्क्रैप की जाने वाली पात्र गाड़ियों के लिए रोड टैक्स और फिटनेस पेनाल्टी में भी छूट दी जायेगी। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा ब्याज सब्सिडी, ईंधन वाउचर, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एकमुश्त प्रोत्साहन राशि तथा वाहन निर्माताओं की ओर से मिलने वाली अतिरिक्त रियायतें भी लाभार्थियों को उपलब्ध होंगी।
सरकार के अनुसार इस योजना से दिल्ली-एनसीआर के करीब 2.07 लाख ट्रक और बस मालिकों को लाभ मिलने की संभावना है। दिल्ली के लिए विशेष प्रावधानों के तहत योजना के माध्यम से खरीदे जाने वाले हल्के मालवाहक वाहन केवल इलेक्ट्रिक होंगे, जबकि बसों के लिए बीएस-6 सीएनजी या इलेक्ट्रिक तकनीक अनिवार्य होगी।
