सिग्नल कोर की ‘डेयर डेविल्स’ टीम ने रोहतांग में बनाया विश्व रिकार्ड

नयी दिल्ली 13 जुलाई (वार्ता) सेना की सिग्नल कोर की ‘डेयर डेविल्स’ टीम ने रोहतांग में अटल टनल पर “व्हील्स ऑफ़ वेलोर: संचार शक्ति” मोटरसाइकिल अभियान के दौरान एक विश्व रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रचा है।

इसमें 10 सवारों ने सिर्फ़ दो मोटरसाइकिलों पर करतब दिखाते हुए 10,075 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित 9.8 किलोमीटर लंबी सुरंग को 9 मिनट और 47.97 सेकंड में पार किया। कारगिल विजय दिवस को समर्पित यह रिकॉर्ड-तोड़ कारनामा सेना के असाधारण कौशल, सटीकता, तालमेल और अटूट जज़्बे को दिखाता है। यह उपलब्धि उस ऐतिहासिक राष्ट्रीय अभियान का मुख्य आकर्षण रही जिसने देश के शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए सिग्नल कोर की विरासत का जश्न मनाया।

इस अभियान को सिग्नल कोर के ऑफिसर-इन-चीफ़ और कर्नल कमांडेंट, लेफ्टिनेंट जनरल विवेक डोगरा ने गत 22 जून को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस अभियान में सिग्नल कोर के बेहतरीन ‘डेयर डेविल्स’ और सिग्नलर्स ने साथ साथ हिस्सा लिया। उन्होंने देश के सबसे मुश्किल इलाकों में साहस, सहनशक्ति और सैन्य पेशेवर कौशलन का प्रदर्शन किया।

विश्व रिकॉर्ड बनाने के बाद, अभियान दल ऊंचे हिमालय की ओर बढ़ा और 16,580 फुट की ऊंचाई पर स्थित मुश्किल शिनकुन ला दर्रे को सफलतापूर्वक पार किया। इसके बाद उन्होंने द्रास में कारगिल युद्ध स्मारक पर अपनी यात्रा पूरी की।

द्रास में, उन पहाड़ों के बीच जहां ‘ऑपरेशन विजय’ के दौरान भारत की शानदार सैन्य जीत हुई थी, इन सवारों ने कारगिल युद्ध के नायकों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। साथ ही, उन्होंने कर्तव्य, सम्मान और निस्वार्थ सेवा के प्रति भारतीय सेना की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया।

अभियान के दौरान, टीम ने हुसैनिवाला और पालमपुर युद्ध स्मारकों पर देश के अमर शहीदों को भी नमन किया और एनसीसी कैडेट, छात्रों, पूर्व सैनिकों और स्थानीय समुदायों के साथ बातचीत की। इन मुलाकातों का मकसद युवाओं को देशभक्ति, नेतृत्व, अनुशासन और देश सेवा के मूल्यों से प्रेरित करना था।

मोटरसाइकिल सवारों ने सिग्नल कोर के अहम संचार केन्द्रों का भी दौरा किया। उन्होंने वहां उन तकनीकी क्षमताओं और ऑपरेशनल तैयारी को दिखाया, जिनकी वजह से भारतीय सेना हर युद्धक्षेत्र और इलाके में “तेज़, सुरक्षित और कनेक्टेड” रह पाती है।

सेना ने कहा कि यह अभियान सिर्फ़ एक मोटरसाइकिल यात्रा से कहीं बढ़कर था और यह साहस, बलिदान और सैन्य उत्कृष्टता के लिए एक राष्ट्रीय श्रद्धांजलि है। देश की सबसे मुश्किल और ज़्यादा ऊंचाई वाली जगहों में से एक पर विश्व बनाने से लेकर हिमालय के दर्रों को पार करने और कारगिल में श्रद्धांजलि देने तक, इस अभियान ने ‘सिग्नल कोर’ की विरासत और भारतीय सैनिकों के जज़्बे को दिखाया।

 

 

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