
जबलपुर। वरिष्ठ साधक और ओशो अनुज स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने शनिवार को पत्रकार वार्ता में ओशो रजनीश के जीवन और ध्यान संबंधी विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि जीवन बदलने के दो मार्ग हैं—राजनीतिक प्रयास जो समाज को बाहर से बदलने की कोशिश करते हैं और आध्यात्मिक मार्ग जो मनुष्य की आत्मा को बदलते हैं। स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने कहा कि असली परिवर्तन भीतर से आता है। “जब कोई व्यक्ति शांत, संतुष्ट और आनंदित होता है, तो उसकी शांति की तरंगें समाज में भी फैल सकती हैं। परिणाम को लक्ष्य बनाना भूल है, ध्यान बिना अपेक्षा के करना चाहिए। उन्होंने विज्ञान और ध्यान के संतुलन पर भी प्रकाश डाला। आज मनुष्य के पास ज्ञान और शक्ति तो बहुत है, लेकिन चेतना उतनी विकसित नहीं है। “विज्ञान हमें शक्ति देता है, ध्यान हमें दिशा देता है। भविष्य का मनुष्य वही होगा, जो प्रयोगशाला में भी हो और ध्यान में भी,” उन्होंने कहा। स्वामी जी ने धर्म, प्रेम और ओंकार के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि जीवन के प्रति श्रद्धा, ध्यान, प्रेम और आंतरिक नाद—यही सच्चा धर्म है। उन्होंने कहा कि परमात्मा को पाना नहीं, पहचानना है—वह हमारी चेतना का अंतर्निहित हिस्सा है। पत्रकार वार्ता के अंत में स्वामी जी ने सभी से आह्वान किया कि जीवन में प्रेम, कृतज्ञता और शांति का अनुभव करें और इसे दूसरों तक पहुंचाएं।
