सिंगरौली : चितरंगी जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत बिरकुनिया में निर्माणाधीन कॉमन सर्विस सेंटर पर तहसीलदार न्यायालय दुधमनिया द्वारा जारी अस्थायी स्थगन आदेश अब विवादों के घेरे में आ गया है।शासकीय माध्यमिक विद्यालय बिरकुनया के प्रधानाध्यापक के आवेदन पर तहसीलदार ने 6 जुलाई को म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 के तहत निर्माण कार्य पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। आदेश जारी होने के बाद ग्राम पंचायत और स्थानीय लोगों ने तहसीलदार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
तहसीलदार के आदेश में उल्लेख किया गया है कि भूमि खसरा क्रमांक 853, रकबा 0.58 हेक्टेयर पर ग्राम पंचायत द्वारा कॉमन सर्विस सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है। आवेदन में कहा गया कि इससे विद्यालय के बच्चों के आवागमन में बाधा उत्पन्न होगी। इसी आधार पर न्यायालय ने निर्माण कार्य तत्काल रोकने और संबंधित पक्षों को नियत तिथि पर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। दूसरी ओर ग्राम पंचायत का कहना है कि जिस भूमि पर निर्माण हो रहा है वह शासकीय भूमि है और राजस्व अभिलेखों खसरा में उसका उपयोग पाठशाला एवं ग्राम पंचायत के नाम दर्ज है। पंचायत का दावा है कि खसरे में कहीं भी खेल मैदान का उल्लेख नहीं है, जबकि स्थगन आदेश में बच्चों के खेल एवं आवागमन का हवाला दिया गया है। सरपंच का आरोप है कि तहसीलदार ने न तो मौके का निरीक्षण किया और न ही ग्राम पंचायत का पक्ष सुनने के बाद आदेश पारित किया।
थाने में भी शिकायत, पुलिस मौन, निर्माण कार्य में बे्रक
ग्राम पंचायत ने यह भी दावा किया है कि कॉमन सर्विस सेंटर का निर्माण शासकीय उपयोग के लिए कराया जा रहा था, ऐसे में सरकारी भूमि पर सरकारी निर्माण को रोकने के आधार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सरपंच का कहना है कि यदि स्थल निरीक्षण और राजस्व अभिलेखों का परीक्षण पहले किया जाता तो स्थिति स्पष्ट हो सकती थी। इधर सरपंच द्वारा मोरवा थाना में प्रधानाध्यापक पर निर्माण कार्य में बाधा पहुंचाने की लिखित शिकायत भी की गई थी। पंचायत का कहना है कि शिकायत दिए लगभग एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद पुलिस स्तर पर कोई ठोस जांच या कार्रवाई नहीं हुई। अब ग्रामीण पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तहसीलदार के स्थगन आदेश, राजस्व अभिलेखों और शिकायतों की वस्तुस्थिति सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।
