देहरादून | उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा आगामी 19 अप्रैल से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ शुरू हो रही है। इस यात्रा को सुरक्षित और निर्बाध बनाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के नेतृत्व में आगामी 10 अप्रैल को एक वृहद मॉकड्रिल का आयोजन किया जाएगा। उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य यात्रा शुरू होने से पहले शासन-प्रशासन की तैयारियों को परखना और संभावित कमियों को चिन्हित कर उन्हें समय रहते दूर करना है। यह मॉकड्रिल न केवल मुख्य धाम वाले जिलों बल्कि पूरे गढ़वाल मंडल में आयोजित की जाएगी।
चारधाम यात्रा का मुख्य पड़ाव रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और चमोली जिलों में स्थित है, लेकिन यात्रा का प्रवेश द्वार ऋषिकेश और हरिद्वार होने के कारण अन्य जिलों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए 10 अप्रैल को होने वाली मॉकड्रिल देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी और टिहरी सहित कुल सात जिलों में एक साथ आयोजित होगी। एनडीएमए के अधिकारी और सदस्य इस दौरान मौजूद रहेंगे और जिला प्रशासन के साथ मिलकर विभिन्न आपदा स्थितियों में प्रतिक्रिया समय (रिस्पांस टाइम) और समन्वय का बारीकी से निरीक्षण करेंगे।
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, इस मॉकड्रिल के दौरान हर जिले की भौगोलिक स्थिति के आधार पर अलग-अलग ‘क्राइसिस सिनेरियो’ तैयार किए जाएंगे। इसमें अचानक भूस्खलन से मार्ग बाधित होना, भारी बारिश, ट्रैफिक जाम, आगजनी, भगदड़ जैसी आपातकालीन स्थितियों का कृत्रिम माहौल बनाया जाएगा। इसके जरिए यह देखा जाएगा कि संबंधित जिलों के पास उपलब्ध संसाधन कितने प्रभावी हैं और वहां के कर्मचारी व बचाव दल कितने प्रशिक्षित हैं। सचिव विनोद सुमन ने स्पष्ट किया कि इस अभ्यास से मिली सीख के आधार पर यात्रा मार्ग के संवेदनशील पॉइंटों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल और मशीनरी तैनात की जाएगी।

