नीमच में गूंजा सनातन का शंखनाद, आचार्य कैलाशानंद गिरी जी महाराज के दर्शन को उमड़ा जनसैलाब

नीमच। सावन मास की पूर्व संध्या पर शनिवार को नीमच सनातन आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। अटल बिहारी वाजपेयी सभागार (टाउन हॉल) में आयोजित विराट सनातन राष्ट्र धर्मसभा एवं संत समागम में सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सभागार पूरी तरह श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया, जबकि बड़ी संख्या में लोग बाहर एलईडी स्क्रीन के माध्यम से संतों के दर्शन एवं प्रवचन सुनते रहे। जय-जय श्रीराम, हर-हर महादेव और भारत माता की जय के उद्घोषों से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में गूंज उठा।

धर्मसभा में देश के प्रख्यात संत, अखाड़ा परिषद के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, उद्योगपति, समाजसेवी तथा हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में अपने आराध्य संतों के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने की अद्भुत श्रद्धा एवं उत्साह देखने को मिला।

महादेव की विशेष कृपा है नीमच पर : आचार्य कैलाशानंद गिरी

परम् शिव उपासक, ब्रह्मनिष्ठ परिव्राजकाचार्य एवं आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री कैलाशानंद गिरी जी महाराज ने अपने ओजस्वी एवं आध्यात्मिक उद्बोधन में कहा कि नीमच केवल एक शहर नहीं, बल्कि धर्म और आध्यात्मिक चेतना की पावन भूमि है। इस नगरी पर भगवान महादेव की विशेष कृपा सदैव बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि संत स्वयं कुछ नहीं करते, बल्कि उनसे जो भी कार्य होता है, वह भगवान शिव की प्रेरणा और कृपा से होता है। ईश्वर को सबसे अधिक प्रिय मनुष्य का पूर्ण आत्मसमर्पण है। उन्होंने कहा कि रामायण, श्रीमद्भगवद्गीता, वेद, पुराण और श्रीमद्भागवत का मूल संदेश यही है कि मनुष्य अपने जीवन को ईश्वर के प्रति समर्पित करे और धर्म, सत्य तथा सेवा के मार्ग पर चले।

सनातन संस्कृति मानवता को देती है जीवन जीने की दिशा

आचार्य श्री ने श्रावण मास की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यह महीना भगवान शिव की उपासना का श्रेष्ठ समय है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित पूजा-अर्चना, जप, तप और सेवा कार्यों से जुडऩे का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म किसी एक वर्ग या समुदाय का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता को प्रेम, करुणा, सेवा, सहिष्णुता और विश्व बंधुत्व का संदेश देने वाली शाश्वत जीवन पद्धति है। आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़े तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए जीवन जीने का संकल्प ले।

श्रावण से पहले धर्मसभा बनी आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र

आचार्य कैलाशानंद गिरी जी महाराज ने कहा कि श्रावण मास प्रारंभ होने से ठीक पहले आयोजित यह धर्मसभा स्वयं इस बात का प्रमाण है कि नीमच की जनता धर्म और अध्यात्म के प्रति गहरी आस्था रखती है। उन्होंने कहा कि जब समाज धर्म से जुड़ता है तो परिवार मजबूत होते हैं, समाज में समरसता आती है और राष्ट्र सशक्त बनता है।

संतों और जनप्रतिनिधियों ने भी रखे विचार

धर्मसभा को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत श्री रविंद्रपुरी जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी मधुसूदनानंद गिरी जी महाराज, जयपुर के हवामहल क्षेत्र के विधायक एवं संत बालमुकुंद आचार्य, सांसद सुधीर गुप्ता, नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार तथा नगर पालिका अध्यक्ष स्वाति चौपड़ा ने भी संबोधित किया।

वक्ताओं ने सनातन संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक समरसता, भारतीय परंपराओं और राष्ट्र निर्माण में धर्म की भूमिका पर अपने विचार रखते हुए समाज को एकजुट होकर सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश दिया।

मंच पर मौजूद रहीं अनेक विशिष्ट हस्तियां

कार्यक्रम में आचार्य श्री के सानिध्य में मंचासीन अतिथियों में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, सांसद सुधीर गुप्ता, चित्तौडग़ढ़ सांसद सी.पी. जोशी, नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार, जावद विधायक ओमप्रकाश सकलेचा, मनासा विधायक अनिरुद्ध माधव मारू, निम्बाहेड़ा विधायक श्रीचंद कृपलानी, जिला पंचायत अध्यक्ष सज्जन सिंह चौहान, नगर पालिका अध्यक्ष स्वाति चौपड़ा, आयोजन समिति के व्यवस्था प्रमुख संतोष चौपड़ा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, उद्योगपति, समाजसेवी एवं धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।

सुरक्षा और व्यवस्थाएं रहीं चाक-चौबंद

धर्मसभा में हजारों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। आयोजन स्थल पर स्वयंसेवकों की टीम श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन, पेयजल, बैठक व्यवस्था और अन्य सुविधाओं के लिए लगातार सक्रिय रही। पूरे कार्यक्रम का संचालन सुव्यवस्थित एवं अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ।

नीमच की धार्मिक पहचान को मिली नई ऊंचाई

आयोजकों ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक प्रवचन कराना नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का संरक्षण, राष्ट्र चेतना का जागरण, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक मूल्यों का प्रसार करना है। कार्यक्रम के समापन पर सभी संत-महात्माओं, अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, सहयोगकर्ताओं एवं हजारों श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

इस ऐतिहासिक धर्मसभा ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि नीमच केवल सीमावर्ती जिला ही नहीं, बल्कि सनातन आस्था, धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक परंपराओं का भी एक सशक्त केंद्र है। श्रद्धालु देर तक ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्रीराम’ के जयघोष के साथ संतों का आशीर्वाद प्राप्त करते रहे।

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