मस्कट, 11 जुलाई (वार्ता) हॉर्मुज जलडमरूमध्य संकट पर चर्चा के लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शनिवार को ओमान पहुंचे। ओमान बातचीत के लिए एक प्रमुख केंद्र बन गया है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच हुए पिछले समझौतों में ओमान को ही उस स्थान के रूप में चिह्नित किया गया था, जहां हॉर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर सहमति बनी थी।
18 जून के समझौते के बाद व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों ने युद्धविराम को समाप्त कर दिया है। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान में फिर से हमले शुरू कर दिये हैं। इन हमलों में चाबहार बंदरगाह के पास बिजली आपूर्ति बाधित हुई है और बुशहर में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) की बैरक को निशाना बनाया गया है।
विदेश मंत्री की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब मध्यस्थ अमेरिका-ईरान के बीच राजनयिक कोशिशों को बहाल करने और तनाव बढ़ने से रोकने में जुटे हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वे उम्मीद करते हैं कि ईरान जल्द ही यह घोषणा करेगा कि जलडमरूमध्य खुला रहेगा और व्यापारिक जहाजों को निशाना नहीं बनाया जायेगा।अधिकारियों ने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि यदि ईरान ऐसा बयान नहीं जारी करता है तो अमेरिका क्या कदम उठायेगा, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि आगे की सैन्य कार्रवाई की संभावना खुली है।
इस बीच एक अन्य घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि अगर ईरानी नेतृत्व ने उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। श्री ट्रम्प ने कहा कि ऐसा हमला होने पर वे ईरान के ‘सभी क्षेत्रों को पूरी तरह तबाह और नष्ट’ कर देंगे। इजरायली खुफिया एजेंसी की ट्रम्प प्रशासन से राष्ट्रपति की हत्या की कथित ईरानी साजिशों के बारे में जानकारी साझा करने की रिपोर्टों के बाद यह सख्त चेतावनी सामने आयी है। जारी राजनयिक कोशिशों के बावजूद दोनों पक्ष एक-दूसरे पर समझौतों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं।
श्री अराघची ने अमेरिका पर अपनी प्रतिबद्धताओं को तोड़ने का आरोप लगाया है, वहीं ईरान के मुख्य वार्ताकार का कहना है कि ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं है और ज़रूरत पड़ने पर वह ‘पूर्ण रक्षा’ के लिए तैयार है। दूसरी ओर श्री ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ पिछला समझौता ‘खत्म’ हो चुका है, हालांकि उन्होंने संकेत दिया है कि बातचीत आगे भी जारी रह सकती है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, ईरान के नव नियुक्त सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई आने वाले घंटों में बयान जारी कर सकते हैं। हमले के बाद से वह सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आये हैं और समर्थकों से लिखित बयानों के जरिये संवाद कर रहे हैं।
इस बीच, फारस की खाड़ी में ईरान को लेकर जारी तनाव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान के साथ फोन पर क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की। बातचीत के विवरण के अनुसार, श्री “रुबियो ने सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आपसी समन्वय के महत्व पर जोर दिया।” इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिका की जवाबी कार्रवाई से मौजूदा संकट गहरा गया है। ईरान लगातार इस बात पर अड़ा है कि उसकी समुद्री सीमा के पास के नौवहन मार्गों पर उसी का नियंत्रण रहना चाहिए। मध्यस्थता के प्रयासों में कतर और पाकिस्तान के शामिल होने से पहले शुरुआती वार्ताओं की मेजबानी भी ओमान ने ही की थी। तनाव के बावजूद ओमान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, क्योंकि इस रणनीतिक जलमार्ग पर किसी भी दीर्घकालिक व्यवस्था के लिए ईरान और मस्कट के बीच सहयोग आवश्यक होगा। लगभग 167 किलोमीटर लंबा यह जलमार्ग ईरान को ओमान के मुसंदम प्रायद्वीप से अलग करता है। यह लगभग 54 किलोमीटर चौड़ा है, जिसके जलक्षेत्र पर ईरान और ओमान दोनों का अधिकार आता है।

