भोपाल: मध्यप्रदेश पुलिस में कार्यवाहक पदस्थापना (ऑफिसिएटिंग चार्ज) की व्यवस्था पर पुलिस मुख्यालय (PHQ) की सख्ती के बाद पूरे विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव शुरू हो गया है। इस फैसले के तहत कार्यवाहक रूप से उच्च पदों की जिम्मेदारी निभा रहे पुलिसकर्मियों को चरणबद्ध तरीके से उनके मूल पदों पर वापस भेजा जा रहा है। विभागीय स्तर पर माना जा रहा है कि इस निर्णय का असर प्रदेशभर में बड़ी संख्या में कर्मचारियों पर पड़ सकता है।
इस प्रक्रिया की शुरुआत पांढुर्णा जिले से हुई है, जहां कार्यवाहक हेड कॉन्स्टेबल के रूप में सेवाएं दे रहे 32 पुलिसकर्मियों को पुनः आरक्षक के मूल पद पर पदस्थ कर दिया गया है। इसे पुलिस मुख्यालय के नए निर्देशों के अमल की पहली बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। अब अन्य जिलों में भी ऐसे मामलों की समीक्षा तेज हो गई है।दरअसल, पुलिस विभाग में वर्षों से नियमित पदोन्नति में देरी और रिक्त पदों के कारण कई आरक्षकों, हेड कॉन्स्टेबलों और अन्य कर्मचारियों को उच्च पदों का कार्यवाहक प्रभार दिया जाता रहा है।
वे संबंधित पद की जिम्मेदारियां निभा रहे थे, लेकिन उनकी नियमित पदोन्नति नहीं हुई थी।पुलिस मुख्यालय का मानना है कि कार्यवाहक व्यवस्था के कारण वरिष्ठता, पदोन्नति और सेवा संबंधी विवाद लगातार बढ़ रहे थे। कई मामलों में न्यायालय तक विवाद पहुंचने के बाद इस व्यवस्था की समीक्षा की गई। इसके बाद नियमित पदोन्नति प्रक्रिया को प्राथमिकता देने और कार्यवाहक प्रभार की व्यवस्था को सीमित करने का निर्णय लिया गया।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, मूल पद पर वापसी को तकनीकी रूप से पदावनति (डिमोशन) नहीं माना जाएगा, क्योंकि संबंधित कर्मचारियों को नियमित पदोन्नति मिली ही नहीं थी। उन्हें केवल प्रशासनिक आवश्यकता के तहत उच्च पद का कार्यभार सौंपा गया था।हालांकि पुलिस मुख्यालय ने अब तक प्रभावित कर्मचारियों की कोई आधिकारिक संख्या जारी नहीं की है, लेकिन विभागीय सूत्रों के अनुसार यदि यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू होती है तो करीब 15 हजार पुलिसकर्मी इसकी जद में आ सकते हैं। आने वाले दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह के आदेश जारी होने की संभावना जताई जा रही है।
