नई दिल्ली, मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच फिर से शुरू हुए सैन्य संघर्ष ने वैश्विक चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिका द्वारा ईरान के महत्वपूर्ण ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद, दुनिया की 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति का मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई इस तेज वृद्धि से वैश्विक अर्थव्यवस्था, विशेषकर तेल पर निर्भर देशों के लिए गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
भारत के आयात बिल और ईंधन कीमतों पर सीधा असर
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा होर्मुज के रास्ते आता है। युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित होने से भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ सकता है, जिसका सीधा दबाव भारतीय रुपये और घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। बीते समय में ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद, अब फिर से तेल कंपनियों को होने वाले संभावित नुकसान के चलते पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम बढ़ने की आशंका बढ़ गई है।
शेयर बाजार में हलचल और बढ़ती महंगाई
इस भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है, जहां प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो आयातित सामानों की लागत बढ़ने से भारत में खुदरा महंगाई का ग्राफ ऊपर जा सकता है। निवेशकों के लिए यह अनिश्चितता का दौर है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता सीधे तौर पर बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है। सरकार और नीति निर्माताओं के लिए अब इस आपूर्ति श्रृंखला के संकट को संभालना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

