तेलंगाना कांग्रेस ने मनरेगा को गरीबों के लिए एक खामोश क्रांति बताया

हैदराबाद, (वार्ता) तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को गरीबों के लिए एक खामोश क्रांति बताया, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर कॉरपोरेट हितैषी होने का आरोप लगाया।

श्री भट्टी ने शुक्रवार को विधानसभा में बोलते हुए भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और मनरेगा को कमजोर करके मजदूरों, गरीबों और मध्यम वर्ग को कॉरपोरेट ताकतों के हवाले करने की साजिश रचने का आरोप लगाया।

उन्होंने जोर देकर कहा कि तेलंगाना में कांग्रेस सरकार काम के अधिकार और ग्रामीण आर्थिक सुरक्षा को कमजोर करने वाले किसी भी कदम का कड़ा विरोध करेगी।

श्री भट्टी ने विधानसभा में एक गरमागरम बहस में भाग लेते हुए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार द्वारा शुरू की गई मनरेगा को एक ‘खामोश क्रांति’ की संज्ञा देते हुए कहा कि इस योजना ने बिना किसी आंदोलन या हिंसा के लाखों लोगों को रोजगार, सम्मान और आर्थिक स्थिरता की गारंटी देकर ग्रामीण आजीविका को आमूल-चूल बदलने का काम किया। उन्होंने कहा, “एक ही झटके में मजदूरों को लाठीचार्ज या विरोध-प्रदर्शन का सामना किए बिना मजदूरी में 100 रुपये की बढ़ोतरी की गई।”

उन्होंने कांग्रेस और भाजपा के बीच वैचारिक अंतर को उजागर करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकारों द्वारा लाए गए कानूनों का उद्देश्य सामाजिक न्याय, संतुलन और सशक्तिकरण था, जबकि भाजपा की नीतियां गरीबों की कीमत पर कॉरपोरेट हितों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि नए कानून ने मजदूरों की मोलभाव करने की शक्ति को कमजोर किया है, ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को खतरे में डाला है और सामाजिक परिवर्तन की नींव को ही खतरा पैदा कर दिया है।

श्री भट्टी ने मांग की कि केंद्र सरकार मौजूदा 60:40 धन अनुपात के साथ राज्यों पर बोझ डालने की बजाय राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के लिए 100 प्रतिशत धन बहाल करे। उन्होंने क्षेत्रीय असमानताओं का हवाला देते हुए कहा कि जहां तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्यों को खर्च किए गए हर 100 रुपये पर सिर्फ 25-40 रुपये मिलते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों को कई गुना अधिक मिलते हैं।

 

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