भोपाल। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने राज्य प्रशासनिक सेवा के 37 परिवीक्षाधीन उप जिला अधिकारियों (डिप्टी कलेक्टर) से कहा कि जनसेवा में ईमानदारी, पारदर्शिता और संवेदनशीलता ही किसी अधिकारी की सबसे बड़ी पहचान होती है। उन्होंने कहा कि प्रभावी सुशासन के लिए प्रशासन और पुलिस के बीच मजबूत समन्वय अनिवार्य है।
शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे परिवीक्षाधीन अधिकारियों ने पुलिस महानिदेशक से सौजन्य भेंट की। यह प्रशिक्षण 30 मार्च से 17 जुलाई तक संचालित किया जा रहा है।
अपने संबोधन में कैलाश मकवाणा ने अधिकारियों से भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और भौतिकवादी सोच से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी की विश्वसनीयता वर्षों की निष्पक्ष, पारदर्शी और समर्पित कार्यशैली से बनती है। जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना ही प्रशासनिक सेवा का मूल उद्देश्य होना चाहिए।
उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभव साझा करते हुए कहा कि टीमवर्क, सकारात्मक नेतृत्व और समन्वित प्रयासों से कठिन से कठिन चुनौतियों का समाधान संभव है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को धैर्य, संवेदनशीलता और सामूहिक कार्यशैली के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश दिया।
पुलिस महानिदेशक ने मध्यप्रदेश पुलिस की कानून-व्यवस्था, सामुदायिक पुलिसिंग, साइबर अपराध नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा तथा तकनीक आधारित पुलिसिंग की प्रमुख पहलों की भी जानकारी दी। उन्होंने हाल ही में सम्पन्न ‘सेफ क्लिक 2.0’ साइबर जागरूकता अभियान की सफलता का उल्लेख करते हुए 15 जुलाई से शुरू होने वाले राज्यव्यापी ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान में सभी सरकारी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया।
