मानवीय रिश्तों की बारीकियों को प्रस्तुत करता विस्फूक

भोपाल। लिटिल बैलेट सभागार में शनिवार शाम रंग त्रिवेणी नाट्य उत्सव के दूसरे दिन नाटक विस्फूक का मंचन हुआ। जिसने दर्शकों को शुरुआत से अंत तक बांधे रखा। सामाजिक महत्व के विषय पर आधारित इस प्रस्तुति ने मानव संवेदनाओं और रिश्तों की जटिलताओं को बेहद प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक के संवाद और अभिव्यक्ति ने सामाजिक व्यवस्था में मौजूद कठोरता और मनुष्यता के भीतर उठते संघर्षों को प्रभावशाली ढंग से उकेरा। एक ओर सरल हास्य और संवेदनात्मक पलों का संतुलन दर्शकों को भावुक भी करता रहा तो दूसरी तरफ सोचने पर भी मजबूर करता रहा। नाटक की मंच सज्जा, संगीत और निर्देशन ने कथा को और सशक्त रूप दिया।

नाटक विस्फूक की कथा

नाटक की कहानी राजबहादुर नाम के व्यक्ति के इर्दगिर्द घूमती है जो समाज में अपनी पहचान स्थापित करने की महत्वाकांक्षा में रिश्तों और संवेदनाओं से दूर होता चला जाता है। शराब उसकी स्थायी साथी बन जाती है और बीता हुआ समय उसे भीतर ही भीतर कचोटता है। इसी अव्यवस्थित जीवन में उसका पुराना दोस्त भोलाराम लौट आता है। भोलाराम सहज और सरल इंसान है जो परिस्थितियों से जूझने का एक मानवीय तरीका दिखाता है। दोनों दोस्तों के बीच संवेदनाओं टकराव और बीते हुए समय के दर्द ने कथा को एक भावपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाया। जीवन में आई चुनौतियों और मानव स्वभाव की टूटन को नाटक ने गहरे रूप में अभिव्यक्त किया।

दृश्य और प्रस्तुति

मंच पर आनंद मिश्रा ने राजबहादुर की भूमिका में प्रभावशाली अभिनय किया। भोलाराम के रूप में शिवेन्द्र सिंह दर्शकों का ध्यान लगातार खींचते रहे। अन्य पात्रों में पंकज पटेल अर्चना आकांक्षा शिवम खुश्यानी हेमराज तिवारी पलक रामूसे अनिलिका मिश्रा मुकेश गौर देवांश चोबेल आदि कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। सभी पात्रों ने अपने अभिनय से कहानी की संवेदना को और मजबूत किया।

 

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