सीहोर। मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस सेवा इन दिनों खुद ही गंभीर संकट से जूझ रही है. जिले में एंबुलेंसों की खस्ताहाल स्थिति लगातार मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ा रही है. कई बार एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंचती, तो कई बार रास्ते में ही जवाब दे देती है. गुरुवार और शुक्रवार को सामने आए दो मामलों ने एक बार फिर एंबुलेंस व्यवस्था की बदहाली उजागर कर दी. एक ओर जिला अस्पताल में भोपाल रेफर किए गए पांच वर्षीय बच्चे की एंबुलेंस का इंतजार करते-करते मौत हो गई, वहीं इछावर के ग्राम मोगराराम में मरीज को लेने पहुंची 108 एंबुलेंस खराब हो गई और काफी प्रयास के बाद भी चालू नहीं हुई। अंतत: दूसरी एंबुलेंस बुलाकर मरीज को अस्पताल पहुंचाया गया.
जिला अस्पताल में गुरुवार को उस समय भावुक और तनावपूर्ण माहौल बन गया, जब महिला ने पत्थर उठाकर अस्पताल परिसर में खड़े शव वाहन के कांच तोड़ दिए. जानकारी के अनुसार राजगढ़ जिले के कुरावर क्षेत्र से पांच वर्षीय बच्चे को गंभीर हालत में इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया था. डॉक्टरों ने उसे भोपाल रेफर कर दिया, लेकिन समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी. इंतजार के दौरान बच्चे ने दम तोड़ दिया. बेटे की मौत से आक्रोशित मां ने वाहन के कांच तोड़ दिए. हालांकि परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से कोई शिकायत नहीं की और अस्पताल प्रशासन ने भी महिला के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है.
बंद हुई 108, धक्का लगाने के बाद भी नहीं हुई स्टार्ट
इछावर विकासखंड के ग्राम मोगराराम में शुक्रवार रात एक डिलेवरी केस के दौरान 108 एंबुलेंस की लापरवाही सामने आई. परिजनों द्वारा सूचना देने पर एंबुलेंस गांव पहुंची, लेकिन चालक ने बताया कि वाहन पहले से खराब है। ग्रामीणों और चालक ने काफी देर तक धक्का लगाकर एंबुलेंस चालू करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में दूसरी एंबुलेंस बुलानी पड़ी, जिसके पहुंचने में भी काफी समय लग गया। इससे मरीज और परिजनों को घंटों परेशान होना पड़ा. ग्रामीणों ने इमरजेंसी सेवा की बदहाल व्यवस्था पर नाराजगी जताई.
जिले भर में सरकारी एंबुलेंसों की हालत खस्ताहाल
जिला अस्पताल सहित जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में 108 सेवा से अलग कुल 13 शासकीय एंबुलेंस उपलब्ध हैं। इनमें से तीन एंबुलेंस पूरी तरह कंडम घोषित होकर बंद पड़ी हैं. इनमें दो जिला अस्पताल और एक आष्टा सिविल अस्पताल की है. शेष 10 एंबुलेंस भी चार से 23 वर्ष पुरानी हो चुकी हैं, जिनकी तकनीकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. समय पर मरम्मत और नई एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई बार तो यह विलंब उनकी जिंदगी के लिए भारी साबित होता है.
हालातों पर बार- बार उठते सवाल
लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं. लोगों का कहना है कि एंबुलेंस जैसी जीवनरक्षक सेवा की नियमित निगरानी, समय पर मरम्मत और पुराने वाहनों के स्थान पर नई एंबुलेंस उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि आपात स्थिति में मरीजों की जान जोखिम में न पड़े.
