
ग्वालियर। न्यायालय में रिकॉर्ड रूम से फाइल नहीं आने के कारण केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा दिए गए समझौता आवेदन पर बुधवार को सुनवाई नहीं हो सकी और टल गई। समझौता प्रस्ताव में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य और उनकी बुआओं राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, मप्र की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया, ऊषा राजे राणा व अन्य के बीच अरबों रुपए की शाही विरासतों के बंटवारे पर अंतिम सहमति बन चुकी है।
तमाम दौर की पारिवारिक बैठकों के बाद समझौते का अंतिम मसौदा तैयार कर लिया गया है, जिस पर अब सिर्फ कानूनी मुहर लगना शेष है। इसके लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से ग्वालियर जिला न्यायालय में आवेदन भी पेश कर दिया गया है। इस ऐतिहासिक महा-समझौते के लागू होते ही दिल्ली, मुंबई, पुणे और ग्वालियर की अदालतों में वर्षों से लंबित एक दर्जन से अधिक मुकदमों का हमेशा के लिए पटाक्षेप हो जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, इस समझौते का आधार व्यावहारिक और कड़वाहट को खत्म करने वाला रखा गया है।
गौरतलब है कि सिंधिया राजपरिवार की अधिकांश संपत्तियां सीधे किसी व्यक्ति के नाम न होकर 1970 के दशक से ‘सर जयाजीराव ट्रस्ट’ और ‘कृष्ण माधव ट्रस्ट’ जैसी संस्थाओं के अधीन हैं। वहीं, दिल्ली की तीन कोठियों में तीनों बुआएं वसुंधरा, यशोधरा और ऊषा राजे निवास करती हैं। पूर्व के पारिवारिक बंटवारे में माधवराव सिंधिया को मिली ‘सिंधिया इंवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड को वर्तमान में ज्योतिरादित्य संभाल रहे हैं।
