भोपाल। सरदार सरोवर परियोजना को लेकर मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच करीब तीन दशक से चला आ रहा वित्तीय विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। सबसे अहम बात यह रही कि गुजरात से 7,669 करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा करने वाला मध्यप्रदेश अब एकमुश्त समझौते के तहत गुजरात को लगभग 550 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा।
नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की मौजूदगी में चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने वन-टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के साथ सरदार सरोवर परियोजना की लागत, मुआवजे और भुगतान को लेकर वर्षों से लंबित वित्तीय दावों का अंतिम निपटारा हो गया।
सरदार सरोवर बांध के डूब क्षेत्र का सबसे बड़ा हिस्सा मध्यप्रदेश में आता है। कुल जलमग्न भूमि का लगभग 55.5 प्रतिशत हिस्सा प्रदेश का है। परियोजना से सबसे अधिक खेती की जमीन, वन क्षेत्र और गांव भी मध्यप्रदेश में प्रभावित हुए। वर्ष 2014 में बांध की ऊंचाई बढ़ाए जाने के बाद प्रदेश की 5,000 हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त भूमि डूब क्षेत्र में शामिल हो गई थी, जिसके आधार पर मध्यप्रदेश ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, वन भूमि और सरकारी परिसंपत्तियों के मद में गुजरात से 7,669 करोड़ रुपये का दावा किया था।
दूसरी ओर गुजरात ने परियोजना की बढ़ी हुई निर्माण लागत का हवाला देते हुए मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान से कुल 7,974.86 करोड़ रुपये की वसूली का दावा किया था। समझौते के तहत सभी लंबित दावों का एकमुश्त निपटारा कर दिया गया है।
समझौते के बाद अमित शाह ने कहा कि नर्मदा अवॉर्ड से जुड़े लंबित भुगतान का वर्षों पुराना विवाद अब सौहार्दपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया है। इसे सहकारी संघवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
