रांची से दुनिया तक… कैसे कैप्टन कूल बने करोड़ों दिलों की धड़कन; जानिए MS धोनी की पूरी कहानी

दुनिया के सबसे चहेते कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का आज 45वां जन्मदिन है। आइए जानते है क्रिकेट के इतिहास के सबसे बेहतरीन फिनिशर और कप्तान की कहानी।

भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शामिल महेंद्र सिंह धोनी आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। 7 जुलाई 1981 को झारखंड के रांची में जन्मे एमएस धोनी ने अपनी मेहनत, शांत स्वभाव और बेहतरीन मार्गदर्शन से भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। दुनिया उन्हें ‘कैप्टन कूल’ के नाम से जानती है। विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में उन्होंने कई ऐसे रिकॉर्ड बनाए, जिन्हें आज भी याद किया जाता है।

धोनी का शुरुआती जीवन
धोनी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता पान सिंह धोनी, पंप ऑपरेटर के तौर पर काम करते थे और मां देवकी देवी होम मेकर हैं। बचपन में धोनी की रुचि फुटबॉल और बैडमिंटन में थी। वो स्कूल की फुटबॉल टीम में गोलकीपर थे। एक कोच की सलाह पर उन्होंने विकेटकीपिंग शुरू की और यहीं से उनके क्रिकेट करियर की शुरुआत हुई।

एमएस धोनी ने 4 जुलाई 2010 को साक्षी सिंह से शादी की। दोनों की एक बेटी जीवा धोनी है, जो सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हैं। मैदान के बाहर धोनी बेहद सादा जीवन जीना पसंद करते हैं। उनके पास 100 मोटरसाईकल, 15-20 कार और 10-12 पालतू जानवर है। उनके रांची स्थित फार्महाउस में कई खास नस्ल के कुत्ते, घोड़े और अन्य जानवर हैं।

रेलवे की नौकरी से टीम इंडिया तक का सफर
क्रिकेट में बड़ा नाम बनने से पहले धोनी भारतीय रेलवे में टिकट कलेक्टर (TTE) के रूप में पश्चिम बंगाल के खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर नौकरी करते थे। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने क्रिकेट खेलना जारी रखा और घरेलू क्रिकेट टीम ए (Team A Division) में शानदार प्रदर्शन किया। इसी बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर 23 दिसंबर 2004 को बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय टीम में अपना पहला मैच डेब्यू खेला था।

उनकी शुरुआत अच्छी नहीं रही, लेकिन उन्होंने जल्द ही अपना हुनर दिखाकर खुदको साबित कर दीया था। 2005 में पाकिस्तान के खिलाफ विशाखापट्नम में 148 रन और श्रीलंका के खिलाफ जयपुर में बिना आउट हुए 183 रन की पारी खेलकर वो दुनिया के सबसे खतरनाक विकेटकीपर बल्लेबाजों में शामिल हो गए।

सेना से जुड़ने का सपना
धोनी बचपन से ही भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहते थे। क्रिकेट में बिजी होने के बावजूद उन्होंने अपने इस सपने को कभी नहीं छोड़ा। उनकी देशभक्ति और योगदान को देखते हुए वर्ष 2011 में भारतीय सेना ने उन्हें टेरिटोरियल आर्मी की पैराशूट रेजिमेंट में सम्मानित लेफ्टिनेंट कर्नल की उपाधि प्रदान की। ये एक सम्मानजनक सैन्य रैंक है, जो असाधारण योगदान देने वाले चुनिंदा नागरिकों को दी जाती है।

सम्मान मिलने के बाद धोनी ने केवल वर्दी पहनकर औपचारिकता नहीं निभाई। वर्ष 2015 में उन्होंने आगरा स्थित पैराशूट प्रशिक्षण केंद्र में कठिन प्रशिक्षण पूरा किया और भारतीय सेना के विमान से पांच सफल पैराशूट जंप लगाकर क्वालिफाइड पैराट्रूपर बने। इसके बाद उन्हें प्रतिष्ठित मैरून बेरेट पहनने का अधिकार मिला।

कैप्टन से कैप्टन कूल बनने का सफर
साल 2007 में धोनी को भारतीय T20 टीम की कप्तानी सौंपी गई। उनकी कप्तानी में भारत ने पहला T20 विश्व कप जीतकर इतिहास रच दिया। इसके बाद 2011 में 28 साल बाद भारत को वनडे विश्व कप जिताया। फाइनल में उनका विजयी छक्का आज भी करोड़ों भारतीयों की यादों में बसा हुआ है। 2013 में भारत ने उनकी कप्तानी में चैंपियंस ट्रॉफी भी जीती।

आपको बता दें की धोनी दुनिया के इकलौते कप्तान हैं जिन्होंने ICC T20 वर्ल्ड कप , ICC ODI वर्ल्ड कप और ICC चैंपियंस ट्रॉफी तीनों खिताब जीते हैं। 15 अगस्त 2020 को एमएस धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की थी। हालांकि, वह आईपीएल (IPL) में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलना जारी रखे हुए हैं और आज भी दुनिया के सबसे लोकप्रिय क्रिकेटरों में गिने जाते हैं।

फिल्म और मनोरंजन की दुनिया में भी पहचान
धोनी ने अपनी पत्नी साक्षी धोनी के साथ (Dhoni Entertainment Pvt. Ltd.) की शुरुआत की। इस प्रोडक्शन हाउस के तहत तमिल फिल्म LGM (लेट्स गेट मैरिड) बनाई। अब वो फिल्मों और मनोरंजन के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं।

एमएस धोनी सिर्फ एक महान क्रिकेटर ही नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। रेलवे में नौकरी करने वाले एक साधारण युवक से लेकर विश्व क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शामिल होने तक का उनका सफर मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल है। यही वजह है कि क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में ‘कैप्टन कूल’ की जगह आज भी पहले जैसी ही बनी हुई है।

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