लोन के नाम पर फैलाया साइबरों ने अपना जाल

इंदौर:शहर में ऑनलाइन लोन ऐप अब लोगों की आर्थिक जरूरत का नहीं, बल्कि साइबर ठगों की ब्लैकमेलिंग का बड़ा हथियार बनते जा रहे हैं. इस साल जनवरी से जून तक क्राइम ब्रांच को साइबर फ्रॉड की 5,500 से ज्यादा शिकायतें मिलीं, जिनमें करीब 1,100 मामले केवल ऑनलाइन लोन ऐप के जरिए ब्लैकमेलिंग के हैं, यानी हर पांचवीं शिकायत इसी तरह के अपराध से जुड़ी है. लगातार बढ़ते मामलों के बाद क्राइम ब्रांच को लोगों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी करनी पड़ी है.

साइबर ठग सोशल मीडिया और इंटरनेट पर तत्काल लोन देने का लालच देकर फर्जी ऐप डाउनलोड करवाते हैं. ऐप इंस्टॉल होते ही वह मोबाइल की गैलरी, कॉन्टैक्ट लिस्ट और अन्य निजी जानकारियों तक पहुंच हासिल कर लेते हैं. इसके बाद कुछ हजार रुपए के लोन के बदले कई गुना रकम की मांग शुरू कर दी जाती है. पैसे नहीं देने पर फोटो एडिट कर अश्लील बनाने, रिश्तेदारों और परिचितों को भेजने या सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर पीड़ितों से वसूली की जाती है.

बदनामी के डर से पुलिस तक पहुंचते कई लोग
जांच में सामने आया है कि कई लोग बदनामी के डर से पुलिस तक पहुंचते ही नहीं हैं. ऐसे में वास्तविक पीड़ितों की संख्या दर्ज शिकायतों से कहीं अधिक होने की आशंका है. ऐसे मामलों में साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान लोन ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी वैधता की जांच करना जरूरी है. बढ़ती घटनाओं को देखते हुए क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि किसी भी ऐप से लोन लेने से पहले यह जरूर जांच लें कि वह भारतीय रिजर्व बैंक से अधिकृत संस्था से जुड़ा है या नहीं. इसके लिए आरबीआई की अधिकृत सूची देखी जा सकती है. यदि ऐप अधिकृत नहीं है तो उससे किसी भी स्थिति में लोन नहीं लेना चाहिए. साथ ही मोबाइल में अनावश्यक परमिशन देने से बचें और ब्लैकमेलिंग होने पर बिना घबराए तत्काल पुलिस को सूचना दें.

जागरुकता ही सबसे बड़ा कवच है
पुलिस लगातार जागरुकता अभियान चलाती है फिर भी ऑनलाइन लोन ऐप के जरिए ब्लैकमेलिंग के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. ऐसे मामलोंम जागरुकता ही सबसे बड़ा कवच है. लोग लोन लेने से पहले ऐप की वैधता जरूर जांचें. यदि कोई फोटो वायरल करने या बदनाम करने की धमकी देकर पैसे मांगता है तो रकम न भेजें और तुरंत पुलिस से संपर्क करें.

– राजेश दंडोतिया, एडीसीपी क्राईम

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