
आलीराजपुर । आज के समय में AI (ARTIFICIAL INTELLIGENCE) का उपयोग बहुत तेजी से बढ़ रहा है और हर कोई इसका इस्तेमाल कर रहा है। ए.आई. हमारी जिंदगी को आसान बनाता है, क्योंकि यह काम को जल्दी और बिना गलती के करता है। आज लगभग 60-70 प्रतिशत लोग ए.आई. का उपयोग करते हैं। कोई मोबाइल में करता है, कोई गेम में, कोई पढ़ाई में और कोई डॉक्टर के काम में। ए.आई. 24 घंटे काम कर सकता है, इसे थकान भी नहीं होती। बच्चे भी ए.आई. को बहुत पसंद करते हैं क्योंकि यह उन्हें चीजें आसान भाषा में समझाता है।
उपरोक्त व्याख्यान युपीएससी एग्जाम में ऑल इण्डिया में 8वीं रेंक प्राप्त करने वाले आई.ए.एस. कलेक्टर बनकर बाग का नाम रौशन करने वाले पक्षाल सेक्रेटरी की छोटी बहन क्रिया सेक्रेटरी बाग ने पदम हाॅल में बच्चों को सम्बोधित करते हुए अपनी मासिक गोष्ठी में कही।
आगे क्रिया सेक्रेटरी ने अपने उद्बोधन में कहा कि अगर हम कोई सवाल पूछें तो ए.आई. तुरंत जवाब दे देता है। डॉक्टर भी ए.आई. की मदद से बीमारियों का जल्दी पता लगा पाते हैं। इसी वजह से लोग ए.आई. का उपयोग और भी बढ़ा रहे हैं। लेकिन ए.आई. के साथ कई नुकसान भी जुड़े हैं। ए.आई. में इंसानों जैसी सोच, भावना, दया या समझदारी नहीं होती। यह सिर्फ वही काम करता है जो इसे प्रोग्राम में दिया गया है। अगर ए.आई. को गलत जानकारी मिल जाए तो यह गलत फैसले भी ले सकता है। ए.आई. में प्राइवेसी का खतरा भी है, क्योंकि कई बार यह हमारा डेटा अपने पास रख लेता है। ए.आई. को बनाने और चलाने में बहुत पैसा लगता है, जो हर कंपनी के लिए आसान नहीं है। सबसे बड़ा नुकसान यह है कि ए.आई. की वजह से लोग आपस में कम बात करने लगे हैं। बच्चे भी ज्यादातर समय मोबाइल और कंप्यूटर पर ही रहते हैं, जिससे मानवीय संबंध कम हो रहे हैं। इसके अलावा, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ए.आई. पर अत्यधिक निर्भरता बढ़ी तो यह लोगों की सोचने और निर्णय लेने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए हमें ए.आई. का उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए। ए.आई. सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह बहुत फायदेमंद है, लेकिन अगर अधिक निर्भरता बढ़ गई तो यह हमारी समस्याएं भी बढ़ा सकता है। ए.आई. अच्छा है, लेकिन इंसान सबसे महत्वपूर्ण है। तकनीक हमारी मदद कर सकती है, पर इंसानी संवेदनाएं और समझदारी कभी मशीन से पूरी तरह नहीं आ सकती। कार्यक्रम में आलीराजपुर सिविल सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष कृष्णकान्त बेड़िया ने बच्चों से कहा कि ए.आई. तकनीक का उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए। इसका दुरूपयोग नही होना चाहिए। हर वस्तु का सम्बंध वास्तविकता से होना चाहिए।
