इंदौर: देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में बाबा लकीशाह बंजारा की 448वीं जयंती पर राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न

इंदौर،  देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के मुख्य सभागार में जनजातीय अध्ययनशाला द्वारा बाबा लकीशाह बंजारा जी की 448वीं जयंती के अवसर पर “बंजारा समाज की संस्कृति एवं सशक्तिकरण” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्वानों, संतों, समाज प्रतिनिधियों और प्रबुद्धजनों सहित लगभग 1500 समाजजन, मातृशक्ति, युवा और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई ने की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय समाज की सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय ज्ञान परंपरा और सामाजिक समरसता के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्य अतिथि महाराष्ट्र सरकार के मुख्यमंत्री सहायक कक्ष प्रमुख श्री रामेश्वर जी नाईक ने बाबा लकीशाह बंजारा के आदर्शों को प्रेरणास्रोत बताते हुए शिक्षा और संगठन को समाज की प्रगति का आधार बताया।

विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य श्री जातोथू हुसैन नायक ने जनजातीय और बंजारा समाज के अधिकारों, शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए संगठित प्रयासों पर बल दिया।

मुख्य वक्ता डॉ. अशोक पवार, स्वर्णिम बंजारा इतिहासकार और वसंतराव नाईक संशोधन तथा प्रशिक्षण केंद्र के संस्थापक-संचालक ने बंजारा समाज के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के प्रामाणिक दस्तावेजीकरण की आवश्यकता पर विचार रखे।

श्री राधे चैतन्य जी महाराज, चारुकेश्वर आश्रम बड़वाह ने कहा कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्य और सामाजिक एकता बाबा लकीशाह बंजारा के जीवन का प्रमुख संदेश हैं। उन्होंने समाज को संस्कार और सेवा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में कुलसचिव श्री प्रज्वल खरे, सहायक कुलसचिव श्री अनुराग द्विवेदी और संयोजक प्रो. सखाराम मुजाल्दे भी मंचासीन रहे। प्रो. मुजाल्दे ने कहा कि विश्वविद्यालय जनजातीय और घुमंतू समुदायों की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं शोध को बढ़ावा दे रहा है।

 

संगोष्ठी के दौरान बंजारा लोकनृत्य, लोकसंगीत और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समाज की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया। देशभर से आए समाज प्रमुखों ने संस्कृति, शिक्षा, इतिहास और सशक्तिकरण पर अपने विचार साझा किए।

 

आयोजन को सफल बनाने में श्री जगदीश परासर और श्री राजा राठौर का विशेष योगदान रहा। संगोष्ठी का मुख्य संदेश रहा कि बाबा लकीशाह बंजारा के आदर्श आज भी समाज को शिक्षा, संगठन, आत्मगौरव और राष्ट्रनिर्माण के लिए प्रेरित करते हैं।

Next Post

​रायसेन के रंगपुरा केसरी गांव में नदी में डूबने से दो मासूम बच्चियों की मौत, गांव में पसरा मातम

Sun Jul 5 , 2026
रायसेन। रायसेन जिले के रंगपुरा केसरी गांव में नदी में डूबने से दो मासूम बालिकाओं की मृत्यु हो गई। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार दोनों बालिकाएं नदी किनारे गई थीं। इसी दौरान वे गहरे पानी में डूब गईं और बहाव के […]

You May Like