
जबलपुर। छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में 30 बच्चों की मौत मामले में मुख्य आरोपी डॉ. प्रवीण सोनी को हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने अपने आदेष में कहा है कि हिरासत की अवधि के अलावा परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। एकलपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए दूसरी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।
छिंदवाड़ा जहरीले सिरप कांड के मुख्य आरोपी डॉ प्रवीण सोनी की तरफ से दायर दूसरी जमानत याचिका में कहा गया था कि उन्हें अपराध में झूठा फंसाया गया है और वह विगत 5 अक्टूबर 2025 से न्यायिक हिरासत में है। वह पूरी तरह से निर्दोष है और कफ सिरप निर्माण में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। पुलिस ने न्यायालय में चालान पेश कर दिया है। ट्रायल में समय लगेगा,जिसके कारण उसे नियमित जमानत का लाभ दिया जाये।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि पहली जमानत याचिका विस्तृत आदेश के साथ खारिज कर गयी थी। जिसमें 30 बच्चों की मौत को गंभीर और संवेदनशील मामले हुए कहा था कि आरोपी को जमानत का लाभ दिया जाता है तो जनता का न्याय से भरोसा बहुत कम हो जाएगा। केन्द्र सरकार के द्वारा नोटिफिकेशन के बावजूद भी आवेदक ने चार साल से कम बच्चों को फिक्स्ड डोज़ कंपाउंड सिरप दिया गया। सरकारी लैबोरेटरी और ड्रग डिपार्टमेंट की रिपोर्ट से यह साफ पता चलता है कि उस कफ सिरप में 46.28 प्रतिशत डायथिलीन ग्लाइकॉल था, जबकि इसकी फार्माकोपिया लिमिट 0.1ः प्रतिशत है। डायथिलीन ग्लाइकॉल एक जाना-माना नेफ्रोटॉक्सिक है, जो बच्चों के लिए खास तौर पर जानलेवा है। डॉ. प्रवीण खापेकर की चेतावनी के बावजूद आवेदक डॉक्टर कफ सिरप लिखता रहा, जिसकी वजह से 4-5 साल से कम उम्र के 26 से अधिक मासूम बच्चों की मौत हो गई। कथित कफ सिरप ने बड़े पैमाने पर लोक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाया और उन्होंने कप सिरप लिखने के लिए कमीशन भी मिला। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि हिरासत की अवधि के अलावा परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। जिसके कारण जमानत आवेदन को निरस्त किया जाता है।