कोलकाता, 03 जुलाई (वार्ता) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री नेता शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को अपनी पूर्ववर्ती ममता बनर्जी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि राज्य की हालत “आज़ादी के बाद से किसी भी मुख्यमंत्री के कार्यकाल में इतनी खराब नहीं रही”।
श्री अधिकारी ने नवनिर्वाचित विधायकों से राज्य की लोकतांत्रिक संस्थाओं और विधायी परंपराओं को बहाल करने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।
पश्चिम बंगाल विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए दो दिवसीय ओरिएंटेशन प्रोग्राम के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि उनका मकसद राजनीतिक हमले करना नहीं, बल्कि पहली बार चुने गए विधायकों के सामने तथ्य रखना है। उन्होंने कहा, “मैं नकारात्मक बातें नहीं कहूंगा, लेकिन मैं आपके सामने तथ्य रखना चाहता हूं। आज़ादी के बाद से बंगाल की हालत किसी भी मुख्यमंत्री के कार्यकाल में इतनी खराब नहीं रही।”
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि वाम मोर्चा के 34 साल के शासन के दौरान, अहम फैसले विधानसभा के बाहर लिए गये। उन्होंने कहा, ” चौंतीस साल तक सब कुछ पार्टी कार्यालय के निर्देशों के अनुसार हुआ। विधानसभा से कुछ नहीं हुआ।” उन्होंने दावा किया कि बाद के 15 वर्षों में स्थिति और खराब हो गयी, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि विपक्ष के नेता रिताब्रता बनर्जी की मौजूदगी में वह राजनीतिक आलोचना पर बात नहीं करना चाहते।
श्री अधिकारी ने कहा, “हम साथ मिलकर आगे बढ़ रहे हैं। हम चाहते हैं कि बंगाल अब अपने पैरों पर खड़ा हो।”
भारत के विभाजन के दौरान 1947 में विधानसभा की ऐतिहासिक भूमिका को याद करते हुए उन्होंने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा विधायकों के सामने अपना पक्ष रखने के बाद सदन ने पश्चिम बंगाल के भारत के साथ बने रहने के पक्ष में मतदान किया था। उन्होंने कहा, “बंगाल का भविष्य इसी विधानसभा में तय हुआ था। हमें उस इतिहास को स्वीकार करना चाहिए और उसकी विरासत को बनाए रखना चाहिए।” नव-निर्वाचित विधायकों को संबोधित करते हुए अधिकारी ने उनसे ओरिएंटेशन प्रोग्राम का पूरा लाभ उठाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, “आप में से कई लोग पहली बार चुने गए हैं। आपको सीखना होगा और ये दो दिन उसी सीखने की प्रक्रिया के लिए हैं।” वर्ष 2006 से विधायक एवं विपक्ष के नेता के तौर पर अपने अनुभव का ज़िक्र करते हुए श्री अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के समय विपक्ष के विधायकों को उचित सम्मान नहीं दिया जाता था। उन्होंने कहा, “मैं पांच साल तक विपक्ष का नेता रहा तथा लगभग हर बजट और महत्वपूर्ण सत्र से पहले मुझे पांच बार विधानसभा से निलंबित किया गया।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि ज़िला अधिकारी और पुलिस अफ़सर अक्सर विपक्ष के चुने हुए प्रतिनिधियों को नज़रअंदाज़ करते थे और उन्हें सरकारी कार्यक्रमों में शामिल नहीं किया जाता था। उन्होंने कहा, “चुनाव राजनीतिक मुक़ाबले के बारे में होते हैं। शासन चलाना अलग बात है। लोकतंत्र को इस तरह काम नहीं करना चाहिए।”
मौजूदा सरकार की तुलना पिछली सरकारों से करते हुए श्री अधिकारी ने कहा कि अब सभी पार्टियों के विधायकों को प्रशासनिक बैठकों और बजट चर्चाओं में बुलाया जाता है। उन्होंने कहा, “मैं अपनी प्रशासनिक बैठकों और बजट चर्चाओं में विपक्ष के विधायकों समेत सभी विधायकों को बुलाता हूँ। हम मिलकर बंगाल बनाना चाहते हैं।”
श्री अधिकारी ने पश्चिम बंगाल की रणनीतिक स्थिति, औद्योगिक आधार, शिक्षण संस्थानों, प्राकृतिक संसाधनों और परिवहन नेटवर्क का भी ज़िक्र किया और राज्य को पूर्वोत्तर के साथ-साथ नेपाल, भूटान और बंगलादेश का प्रवेश द्वार बताया। उन्होंने कहा, “हमारे पास विकास के लिए ज़रूरी सभी संसाधन मौजूद हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में, हमें लोकतंत्र को मज़बूत करना होगा, संसदीय प्रणाली को सुदृढ़ करना होगा और बंगाल को एक बार फिर महान बनाना होगा।”
