नयी दिल्ली, 3 जुलाई (वार्ता) केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने शुक्रवार को यहां उद्योग जगत से साइबर सुरक्षा पर पर्याप्त संसाधन और समय खर्च करने पर बल देते हुए शुक्रवार को कहा कि ” योजनाबद्ध सुरक्षा ” का सिद्धांत अपनाना जरूरी है।
उन्होंने हर साइबर हमले की सूचना अधिकारियों के साथ साझा किये जाने का भी आह्वान किया ताकि परस्पर सहयोग से सतर्कता उपायों को अधिक मजबूत किया जा सके। वह यहां भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी के सहयोग से यहां आयोजित ‘साइबर सिक्योरिटी 360 ” शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उनकी राय में सूचना प्रौद्योगिकी पर सरकार के कुल खर्च में कम से कम 15 प्रतिशत हिस्सा साइबर सुरक्षा पर जाना चाहिए।
श्री कष्णन ने कहा कि इंटरनेट पारिस्थितिकी तंत्र में स्वदेशी साइबर सुरक्षा उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए1 उन्होंने कहा कि हर साइबर हमले और साइबर सेंधमारी के हर प्रयास की सूचना भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (सीईआरटी-इन) को देनी चाहिए, ताकि सामूहिक सुरक्षा और सूचना साझाकरण को मजबूत किया जा सके। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा के लिए निरंतर सतर्कता आवश्यक है और कोई भी संगठन इसे हल्के में लेने का जोखिम नहीं उठा सकता।
रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त महानिदेशक एवं सलाहकार डॉ. अमित शर्मा ने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने अपने प्रौद्योगिकी विकास कार्यक्रम के अंतर्गत केवल अनुसंधान उद्देश्य से फाउंडेशनल एआई मॉडल विकसित करने के लिए रुचि-पत्र आमंत्रित करने की निविदा जारी कर दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि क्वांटम कंप्यूटिंग के विकास के साथ वर्तमान पारंपरिक क्रिप्टोग्राफिक (एन्क्रिप्शन) प्रणालियाँ अप्रभावी हो जाएँगी। इसलिए पोस्ट-क्वांटम के आगे के दौर के लिए क्रिप्टोग्राफी की ओर बढ़ना देश की राष्ट्रीय प्राथमिकता होना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि राजदूत अशोक कुमार मुखर्जी ने कहा कि दिसंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा साइबर अपराध पर अपनाया गया कन्वेंशन कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण ढांचा प्रदान करता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय डिजिटल शासन में विश्वास की कमी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने इस क्षेत्र के लिए भारत से ऐसी सक्रिय राष्ट्रीय रणनीति अपनाने का आग्रह किया।
सीआईआई साइबर सुरक्षा टास्क फोर्स के अध्यक्ष एवं पूर्व राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक डॉ. गुलशन राय ने 360-डिग्री साइबर सुरक्षा तैयारी में प्रौद्योगिकी , सुशासन, साइबर अपराध और भू-राजनीति पर चौकस नजर – चार प्रमुख स्तम्भ बताया।उन्होंने कहा कि 5जी और 6जीजैसी उन्नत संचार प्रणालियों के कारण साइबर हमलों का दायरा काफी बढ़ गया है, जिससे बड़े उद्योगों के साथ-साथ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम अधिक जोखिम में आ गए हैं।
सीआईआई साइबर सुरक्षा टास्क फोर्स के सह-अध्यक्ष तथा 63 सैट्स साइबरटेक के प्रबंध निदेशक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और मुख्य सूचना अधिकारी निहार पाठारे ने एकीकृत “ज़ीरो ट्रस्ट ” सुरक्षा मॉडल अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि केवल पैसिव (अप्रतिरोधी) सुरक्षा पर्याप्त नहीं हैं। अब समय आ गया है कि संगठन सक्रिय, बुद्धिमान और साइबर हमलों से जूझने में समर्थ सुरक्षा प्रणाली अपनाएँ, ताकि स्थल और नभ में उच्च-मूल्य वाले अंतरिक्ष-आधारित संसाधनों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
