विकसित भारत की यात्रा में म्यूचुअल फंड उद्योग निभायेगा महत्वपूर्ण भूमिका: सेबी सदस्य

नयी दिल्ली, 03 जुलाई (वार्ता) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्णकालिक सदस्य अमरजीत सिंह ने शुक्रवार को कहा कि घरेलू म्यूचुअल फंड (एमएफ) उद्योग ने उल्लेखनीय प्रगति की है और देश के वित्तीय बाजारों में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरा है, लेकिन इसमें अब भी विकास की काफी संभावनाएं हैं और यह विकसित भारत की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। श्री सिंह ने यहां उद्योग संगठन एसोचैम के 17वें म्यूचुअल फंड शिखर सम्मेलन में कहा, “यह देखकर खुशी होती है कि देश का म्यूचुअल फंड उद्योग आज हमारे वित्तीय बाजारों में एक महत्वपूर्ण शक्ति बन चुका है और तीन प्रमुख आयामों पर प्रभावी भूमिका निभा रहा है।

यह परिवारों को पारदर्शी एवं लागत प्रभावी तरीके से दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण में भागीदारी का अवसर देता है। यह देश की आर्थिक वृद्धि के लिए स्थिर एवं धैर्यवान घरेलू पूंजी उपलब्ध कराता है। सूचीबद्ध कंपनियों में एक महत्वपूर्ण शेयरधारक के रूप में यह बेहतर कॉरपोरेट प्रशासन को बढ़ावा देता है। विकसित भारत की यात्रा में इन तीनों क्षेत्रों में और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “हमने उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अवसर अभी भी बहुत बड़ा है क्योंकि करोड़ों भारतीय परिवार अब भी म्यूचुअल फंड से जुड़े नहीं हैं।

उन्हें जोड़ने के लिए उत्पाद विकास, वितरण व्यवस्था और निवेशक संवाद में नवाचार के साथ निवेशक संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी क्योंकि एक बार विश्वास टूट जाने पर उसे दोबारा बनाना बेहद कठिन होता है।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी हितधारकों – नियामकों, उद्योग जगत, वितरकों, निवेशक संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों – के सामूहिक प्रयासों से ऐसा निवेश तंत्र तैयार हो सकता है जो विकसित भारत की आकांक्षाओं के अनुरूप हो। एसोचैम के राष्ट्रीय वस्तु बाजार एवं निवेश परिषद के अध्यक्ष तथा जिंदल एक्सपोर्ट्स एंड इम्पोर्ट्स के चेयरमैन एस.के. जिंदल ने कहा कि पूरी दुनिया भारत को केवल एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक विकास, नवाचार और अवसरों के भरोसेमंद केंद्र के रूप में देख रही है। विकसित भारत का सपना अब केवल एक आकांक्षा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मिशन बन चुका है, जिसमें प्रत्येक संस्था, प्रत्येक उद्योग और प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण भूमिका है। मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत पूंजी निर्माण आवश्यक है और म्यूचुअल फंड करोड़ों परिवारों की बचत को उत्पादक उद्यमों से जोड़कर निवेशकों के लिए संपत्ति निर्माण के साथ-साथ देशके विकास को वित्तीय आधार प्रदान करते हैं।

इंडसइंड सिक्योरिटीज लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) लव चतुर्वेदी ने कहा कि भारत में लोग पारंपरिक रूप से सोने और रियल एस्टेट में निवेश करना पसंद करते रहे हैं। लेकिन म्यूचुअल फंड उद्योग ने लोगों की बचत को भौतिक संपत्तियों से निकालकर वित्तीय निवेश की ओर मोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है। दस वर्ष पहले म्यूचुअल फंड परिसंपत्तियों का अनुपात फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में लगभग 10-12 प्रतिशत था, जो आज बढ़कर लगभग 33 प्रतिशत हो गया है। यह वास्तव में उल्लेखनीय उपलब्धि है।

पेटीएम मनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ संदीप भारद्वाज ने कहा कि म्यूचुअल फंड उद्योग देश के आर्थिक परिवर्तन के केंद्र में है। हालांकि उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद देश में इसकी पहुंच सीमित है। अधिकांश भारतीय परिवार औपचारिक निवेश व्यवस्था से बाहर हैं। इसलिए हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य बाजार हिस्सेदारी बढ़ाना नहीं, बल्कि निवेशकों की संख्या बढ़ाना होना चाहिये। ‘धन’ के संस्थापक जयप्रकाश गुप्ता ने कहा कि भारत हमेशा से बचत प्रधान देश रहा है। अब चुनौती यह है कि इन बचतों को व्यवसायों, नवाचार, विकास और देश के भविष्य में स्वामित्व में बदला जाये। यह केवल पूंजी बाजार तथा म्यूचुअल फंड उद्योग के माध्यम से संभव है। पहले निवेश को जटिल माना जाता था, लेकिन तकनीक ने इस प्रक्रिया को सरल बनाया है, निवेशक अधिक जागरूक हुए हैं। कार्यक्रम में केयरएज रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक संजय अग्रवाल और नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के मुख्य व्यवसाय अधिकारी समीर पाटिल भी मौजूद थे।

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