बेंगलुरु, कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि स्कूल कैंपस में बस में चढ़ने से लेकर घर सुरक्षित पहुंचने तक विद्यार्थी की सुरक्षा की पूरी जवाबदेही स्कूल प्रबंधन की है। कोर्ट ने एक प्राइवेट स्कूल की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें बस हादसे में एक छात्र की आंख गंवाने के मामले में दर्ज क्रिमिनल केस को रद्द करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने माना कि यह मामला केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी का है।
जांच का विषय बनी लापरवाही
मद्दुर के इस मामले में 1 अगस्त 2025 को स्कूल बस में पटाखों के फटने से चौथी कक्षा के एक छात्र की आंख की रोशनी चली गई थी। कोर्ट ने सवाल उठाए कि बस में अटेंडेंट क्यों नहीं था और सीसीटीवी कैमरे क्यों निष्क्रिय थे। बेंच ने कहा कि इन गंभीर सवालों के जवाब विस्तृत जांच के बाद ही मिल सकते हैं, इसलिए शुरुआती चरण में जांच को रोकना न्यायोचित नहीं है।
प्रबंधन के दावों पर सवाल
स्कूल प्रबंधन ने अपनी दलीलों में इसे किसी अन्य बच्चे की गलती बताया था, लेकिन सरकार के वकील ने पुष्टि की कि घटना के समय सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि इस प्रकार की लापरवाही के मामले में स्कूल प्रशासन की भूमिका की जांच अनिवार्य है। यह फैसला देशभर के स्कूलों के लिए एक कड़ा संदेश है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

