
छतरपुर। जिला अस्पताल में अज्ञात मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। नौगांव से सड़क दुर्घटना में घायल होकर रेफर किए गए करीब 45 वर्षीय व्यक्ति की उपचार के दौरान मौत हो गई, लेकिन उसके पास मिले मोबाइल, पर्स और नकदी समय पर पुलिस को नहीं सौंपे गए। इसके चलते मृतक का शव तीन दिन तक जिला अस्पताल की मर्चुरी में अज्ञात अवस्था में पड़ा रहा, जबकि परिजन उसकी तलाश में भटकते रहे। बाद में नौगांव पुलिस की सूचना पर शव की पहचान उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के महोबकंठ थाना क्षेत्र के कोटरा निवासी रामकुमार के रूप में हुई।
जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह घायल को नौगांव अस्पताल से जिला अस्पताल रेफर किया गया था, जहां ट्रॉमा वार्ड में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक के सामान को लेकर अस्पताल कर्मचारियों के अलग-अलग दावे सामने आए। वार्ड बॉय ने सामान नर्सिंग ऑफिसर को सौंपने की बात कही, नर्सिंग ऑफिसर ने इमरजेंसी इंचार्ज को जिम्मेदार बताया, जबकि इंचार्ज ने जानकारी होने से इनकार कर दिया। अस्पताल पुलिस चौकी प्रभारी ने पूछताछ की, लेकिन सभी कर्मचारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे। यदि मोबाइल और दस्तावेज समय पर पुलिस को सौंप दिए जाते तो मृतक की पहचान पहले ही हो सकती थी।
सिविल सर्जन डॉ. शरद चौरसिया ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है और यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि वार्ड बॉय ने सामान सुरक्षित रखने के उद्देश्य से नर्स के ड्रॉअर में रख दिया था, लेकिन इसकी सूचना नहीं दी। वहीं अस्पताल पुलिस चौकी ने बताया कि मृतक का पर्स और करीब तीन हजार रुपये सुरक्षित रखे गए हैं, जिन्हें जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद वैधानिक रूप से परिजनों को सौंपा जाएगा। घटना ने जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली और पुलिस-अस्पताल समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
