नई दिल्ली | विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, 2025 आज 1 जुलाई से पूरे देश में प्रभावी हो गया है। केंद्र सरकार ने नई ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत मजदूरी दरों में महत्वपूर्ण वृद्धि की है। अब राष्ट्रीय औसत मजदूरी 298.8 रुपये प्रति दिन से बढ़कर 327.4 रुपये प्रति दिन हो गई है। यह संशोधन देश के सभी 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों को औसतन 10 प्रतिशत से अधिक का सीधा लाभ मिलेगा।
125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी
नए अधिनियम के तहत अब पात्र ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष 125 दिनों की सवैतनिक रोजगार गारंटी मिलेगी, जो पहले के 100 दिनों के फ्रेमवर्क से अधिक है। सरकार ने 300 रुपये का एक नया अंतरिम बेस वेज रेट भी निर्धारित किया है, जिससे किसी भी राज्य में मजदूरी इस स्तर से कम न हो। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मजदूरी में 15 से 25 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि की गई है, जिसका उद्देश्य कम मजदूरी वाले क्षेत्रों में सुधार करना है।
विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस योजना के सुचारू कार्यान्वयन के लिए राज्यों को 95,692.31 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन जारी किया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे ‘विकसित भारत’ की नींव बताते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य ग्रामीण श्रमिकों को निरंतर रोजगार सुनिश्चित करना है। हरियाणा, गोवा और केरल जैसे राज्यों में मजदूरी दरें पहले से ही उच्च स्तर पर हैं, और नए फ्रेमवर्क से पूरे देश के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

